मध्य-पूर्व में युद्ध का कोहराम। शेयर बाज़ार में अफरातफरी का आलम। हर दिन और हफ्ते निवेशकों की भीड़ हांकनेवाले दिग्गज कह रहे हैं कि यह मंदी का बाज़ार है और सब कुछ बेच-बांचकर निकल लो। लम्बे निवेश की सोच व दृष्टि रखनेवाले निवेशकों को इस भेड़चाल से मुक्ति पानी होगी। यह सच है कि अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर थोपे गए युद्ध की क्रिया-प्रतिक्रिया में कच्चे तेल के दाम करीब 25% बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुके हैं, जबकि इसी दौरान अपना निफ्टी-50 सूचकांक 8.05% गिर चुका है। बाज़ार पूंजीकरण को आधार बनाएं तो महज दो हफ्ते में सांकेतिक रूप से निवेशकों के करीब 34 लाख करोड़ स्वाहा हो चुके हैं। लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू देखें तो बाज़ार में मचे इस धूम-धड़ाम ने बहुत से शेयरों को आसमान से ज़मीन पर ला पटका है। वैसे, अर्थव्यवस्था में छाई पस्ती के चलते अब भी तमाम स्टॉक्स 50 से अधिक पी/ई अऩुपात पर ट्रेड हो रहे हैं। लेकिन 52 हफ्ते के न्यूनतम स्तर के करीब चल रहे शेयर बाज़ार ने निवेश के अनेक अवसर पेश कर दिए हैं तो यह भागने का नहीं, ऐसे अवसरों की पकड़ लेने की बेला है। वैसे भी अपना बाज़ार लम्बे समय में कुलांचे मारता रहा है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…
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