जिस अर्थव्यवस्था के आकार को लेकर सरकार पिछले कई साल से डींग मार रही थी कि हम दुनिया की पांचवीं के बाद चौथी अर्थव्यवस्था बन गए हैं और जल्दी ही तीसरी अर्थव्यवस्था बनने जा रहे हैं, उसका आकार 2022-23 को आधार वर्ष बनाते ही घट गया है। पुरानी सीरीज़ में 2022-23 में अर्थव्यवस्था का आकार या नॉमिनल जीडीपी ₹268,90,473 करोड़ था, जो नई सीरीज़ में इससे 2.9% कम ₹261,17,627 करोड़ निकला है। इसी तरह 2023-24 में नॉमिनल जीडीपी 301,22,950 करोड़ से 3.8% कम ₹289,83,909 करोड़ और 2024-25 में ₹330,68,145 करोड़ से 3.8% कम ₹318,07,309 करोड़ ही निकला। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भी पुरानी सीरीज़ से जीडीपी का पूर्व अनुमान 357,13,886 करोड़ था, जबकि नई सीरीज़ में इससे 3.27% कम 345,47,157 करोड़ निकला है। सरकार रीयल जीडीपी की विकास दर के 2023-24 में 9.2% होने का दावा कर रही थी, जबकि वो 7.2% ही निकली। 2024-25 में ज़रूर 6.5% के बजाय अब 7.1% निकाली गई है। असल में नई सीरीज़ में जीडीपी निकालने में इस्तेमाल किए जाने वाले डेटा के स्रोत और गणना के तरीके बदल दिए गए हैं। खुद सांख्यिकी मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने माना है कि आधार वर्ष और डेटा से स्रोत बदलने से जीडीपी की विकास दर में 2-3-4% का फर्क पड़ रहा है। अब शुक्रवार का अभ्यास…
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