मोदी सरकार की विशेषता यह है कि उसने अर्थव्यवस्था के हिसाब-किताब में सतही को असली और असली को नकली बना दिया है। पहले हम नॉमिनल जीडीपी के बजाय रीयल जीडीपी और उसकी विकास दर को देखते थे। लेकिन रीयल विकास दर अब इतनी नकली हो गई है कि असली तस्वीर जानने के लिए नॉमिनल या सतह पर तैरती विकास दर को देखना पड़ता है। लेकिन यह करतब भी काम नहीं कर रहा। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी की नॉमिनल विकास दर का बजट अनुमान 10.1% था। लेकिन यह पुरानी सीरीज के पूर्व अनुमान में 8% और नई सीरीज़ के अनुमान में भी 8.6% ही निकला है। फिर भी नए वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार ने जीडीपी की नॉमिनल विकास दर का अनुमान 10% रखा है। माना गया है कि हमारा जीडीपी 2025-26 के ₹357.14 लाख करोड़ से 10% बढ़कर ₹393 लाख करोड़ हो जाएगा। तब ₹16.96 लाख करोड़ का राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3% बनेगा। नई सीरीज में 2025-26 का जीडीपी ₹345.47 लाख करोड़ ही निकला है तो ₹393 लाख करोड़ तक पहुंचने के लिए जीडीपी की नॉमिनल विकास दर को 13.76% रहना होगा। तभी राजकोषीय घाटे को 4.3% तक सीमित रखने का लक्ष्य पूरा होगा। यह होगा कैसे? अब गुरुवार की दशा-दिशा…
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