आम जीवन की तरह निवेश की दुनिया में भी धारणाए व मान्यताएं हकीकत से टकराकर बराबर टूटती रहती हैं। इसलिए धारणाओं और मान्यताओं से चिपके रहना गलत है। 28 फरवरी को अमेरिका-इज़राइल ने ईरान पर हमला किया तो शुरू में जानी-समझी प्रतिक्रिया हुई। शेयर बाज़ार गिर गए, मुद्राएं कमज़ोर पड़ गई और जिंसों के दाम बढ़ गए। सोने के दाम खटाक से 2.15% और चांदी के दाम 1.63% बढ़ गए। कहा जाने लगा कि देश में सोना जल्दी ही ₹2 लाख प्रति दस ग्राम का हो जाएगा। कुछ नहीं तो ₹1.75 लाख से ₹1.8 लाख का तो हो ही जाएगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। मध्य-पूर्व में हफ्ते भर में युद्ध के विकराल होते जाने के बावजूद सोना ₹1.60 लाख के आसपास है। सच है कि संकटकाल में सोने की खरीद बढ़ जाती है। डॉलर के कमज़ोर और कच्चे तेल के महंगे होने पर भी लोग सोने की शरण में जाते हैं। लेकिन हर समय परिस्थितियां एक जैसी नहीं होतीं। पिछले एकाध साल में सोने के दाम लोगों नहीं, देशों की खरीद से चढ़े हैं। लेकिन इस बार युद्ध छिड़ने के बाद तमाम देशों के केंद्रीय बैंक भंडार का सोना बेचकर हथियार व गोला-बारूद खरीद रहे हैं। मध्य-पूर्व का युद्ध गहराया तो सोना और गिर सकता है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…
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