जो जितना ज्यादा पढ़-लिख लेता है, उसे देश के भीतर काम मिलना उतना ही मुश्किल हो जाता है। इसकी तस्दीक करते हैं बेरोज़गारी के आंकड़े। सीएमआईई के मुताबिक, भारत में बेरोज़गारी की औसत दर 7.5% चल रही है। लेकिन अगर ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट व इंजीनियरों वगैरह की बेरोजगारी को अलग से गिनें तो उनका आंकड़ा 17.2% निकलता है। यूं तो जिनकी अधिकतम पढ़ाई 10वीं से 12वीं तक हुई है, उनमें भी ज्यादा बेरोज़गारी है, फिर भी उनकी दर ग्रेजुएट्स से कम 10.9% है। मुश्किल यह है कि अपने यहां काम के पर्याप्त के अवसर नहीं और जो हैं भी, वे अच्छे स्तर के नहीं। इसलिए अच्छे काम की तलाश में नौजवान लड़के-लड़कियां अमेरिका, कनाडा, यूरोप व ऑस्ट्रेलिया जैसे देश चले जाते हैं। स्थिति यह है कि देश के नौकरी प्राप्त लोगों में ग्रेजुएट व पोस्ट ग्रेजुएट्स का हिस्सा 12% रह गया है। अब मंगलवार की दृष्टि…
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