तब कहां, अब कहां है सागर सीमेंट

रमेश दामाणी बड़े ब्रोकर हैं। बाजार के उस्ताद हैं, खिलाड़ी हैं। 13 अप्रैल को एक चैट में उनसे पूछा गया कि सागर सीमेंट क्या 1-2 साल के लिए मल्टीबैगर (कई गुना रिटर्न देनेवाला) स्टॉक हो सकता है तो उन्होंने यह कहते इसमें खरीद की सलाह थी कि यह बहुत अच्छी तरह चलाई जा रही कंपनी है और इसके पीछे अच्छे उद्यमी हैं। उस दिन इसका बंद भाव बीएसई में 187.65 रुपए था। उसके बाद 26 अप्रैल को यह ऊपर में 214 रुपए तक चला गया। इसी बीच दामाणी ने 11 मई को फिर अपनी पुरानी राय दोहराई और कुछ दिन बाद यह भी बताया कि इस शेयर में उनकी होल्डिंग है।

इस दौरान यह शेयर गिरता रहा। 11 मई को यह 183.75 रुपए पर था। गिरते-गिरते बीते शुक्रवार 16 जुलाई तक यह बीएसई में 147 रुपए पर पहुंच गया है। इससे पहले 1 जुलाई को यह 141 रुपए के न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुका है। इसका 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 268.95 रुपए है जो इसने करीब साल भर पहले 29 जुलाई 2009 को हासिल किया था। कंपनी का शेयर बीएसई के साथ-साथ एनएसई में भी लिस्टेड है। लेकिन इसमें कारोबार कम होता है। शुक्रवार को बीएसई में इसके महज 761 शेयरों में कारोबार हुआ था, जबकि एनएसई में हुआ कारोबार इससे भी कम 289 शेयरों का था।

यह हैदराबाद की कंपनी है। साल 2007 से 10 रुपए अंकित मूल्य के शेयर पर प्रति शेयर एक से ढाई रुपए का लाभांश देती रही है। वित्त वर्ष 2009-10 में उसने 479.57 करोड़ रुपए की आय पर 19.12 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। इसके आधार पर उसका ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 12.75 रुपए और बुक वैल्यू 138.05 रुपए है। यानी, कंपनी का शेयर लगभग अपनी बुक वैल्यू के बराबर भाव पर ट्रेड हो रहा है। इसका पी/ई अनुपात 11.53 है, जबकि इसी उद्योग की कंपनी एसीसी का पी/ई अनुपात 9.49 और केसीपी का 6.36 है।

कंपनी के निदेशक बोर्ड ने 21 जनवरी 2010 को फैसला किया था कि वह अपनी सब्सिडियरी सागर पावर की हिस्सेदारी बेच देगी। अब इस पर अमल शुरू हो गया है और कंपनी को सागर पावर में अपने 27,72,430 शेयरों में से 14,67,830 शेयरों के लिए प्रति शेयर 59 रुपए मिलेंगे, जबकि पुराने करार के मुताबिक बाकी 13,04,600 शेयर वह 10 रुपए अंकित मूल्य पर ही निकालेगी। कंपनी जल्दी ही चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे घोषित करेगी।

रमेण दामाणी का सिफारिश, लगभग 52 हफ्ते का न्यूनतम स्तर, भाव बुक वैल्यू के लगभग आसपास। यह सारी चीजें दर्शाती हैं कि इस शेयर को ले लेना चाहिए। लेकिन ले लिया तो क्या यह बिक पाएगा क्योंकि इसमें खरीद-फरोख्त ज्यादा नहीं होती? फिर दामाणी ने जब से बताया था, तब से यह शेयर 20 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है!!! कहने का मतलब यही है कि बड़े नामों की तरफ से की गई सिफारिश भी शेयर के बढ़ने की गारंटी नहीं होती। हमें खुद कंपनी का वर्तमान और भविष्य अच्छी तरह समझना होगा।

पैसा हमारा लग रहा है तो किसी के कहने पर उसे यूं ही लगा देने का मतलब नहीं है। हमें कम से कम उस स्थिति में ही निवेश करना चाहिए जब हम कह सकें कि हमने समझ-बूझ कर जोखिम उठाया था। फायदा या घाटा जो भी हुआ, उसके जिम्मेदार हम खुद हैं। इसीलिए कहते हैं कि सुनो सबकी, करो अपने मन की। लेकिन इसके लिए मन को शिक्षित करना पड़ना है। कंपनी के बारे में काम भर की बहुत सारी जानकारियां बीएसई व एनएसई की वेबसाइट पर उपलब्ध रहती हैं। कंपनी अपनी वेबसाइट पर भी काफी कुछ बताती है। शेयर बाजार में निवेश से कमाई के लिए भी मेहनत करनी पड़ती है, पढ़ना-समझना पड़ता है। लॉटरी खेलने और शेयर बाजार में पैसा लगाने का यह बुनियादी फर्क है।

कल हम एचडीएफसी सिक्यूरिटीज की तरफ से सुझाए गए एक शेयर की चर्चा करेंगे और देखेंगे कि उनकी सुझाई कंपनी में कितना दम है, क्या संभावनाएं हैं।

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