हाथ फैलाते जाइए, लोगों से जुड़ते जाइए, नेटवर्क बनाते जाइए। यह विकास का क्षैतिज तरीका है। लेकिन मन से जुड़ना और मन से बढ़ना है तो इंसान के अपने अंदर का ऊर्ध्व विकास जरूरी है।
2011-02-19
हाथ फैलाते जाइए, लोगों से जुड़ते जाइए, नेटवर्क बनाते जाइए। यह विकास का क्षैतिज तरीका है। लेकिन मन से जुड़ना और मन से बढ़ना है तो इंसान के अपने अंदर का ऊर्ध्व विकास जरूरी है।
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