दुनिया को दिखाना है ताकि भारत को हर कोण से बेचने का चौकस माहौल बना रहे। मोदी सरकार ने दलाली के साध्य के लिए जीडीपी को देश बेचने का साधन बना दिया है। बाकी देश व अवाम जाए भाड़ में। बस जीडीपी चमकता दिखना चाहिए। उसे फर्क नहीं पड़ता कि देश के लगभग 80% स्वरोजगार में लगे व नौकरीपेशा लोगों की वास्तविक आय पिछले कुछ सालों में घट गई है, जबकि इसी दौरान स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्टेड करीब 3000 निजी कंपनियों का मुनाफा साल-दर-साल 18% बढ़ता रहा है। वो खुश है कि गौतम अदाणी और उनका परिवार ₹9.23 लाख करोड़ की नेटवर्थ के साथ फिर भारत का सबसे अमीर कुनबा बन गया है, जबकि ₹8.63 लाख करोड़ की नेटवर्थ के साथ मुकेश अंबानी का परिवार दूसरे नंबर पर है। हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2026 के मुताबिक भारत में इस समय 391 अरबपति हैं, पिटे हुए रुपए में नहीं, बल्कि चढ़े हुए डॉलर में। इन सबकी बदौलत जीडीपी बढ़ रहा है और भारत की प्रति व्यक्ति आय भी बढ़ रही है। मोदी सरकार को इसी बढ़े हुए औसत से मतलब है। इसी औसत को चढ़ाने के लिए वो 81.35 करोड़ भारतीयों को हर महीने पांच किलो मुफ्त राशन देने पर भारतीयों के ही टैक्स से मिले ₹2.27 लाख करोड़ उड़ा देती है। वैसे, यह रकम तो अदाणी की नेटवर्थ की 24.6% और अंबानी की नेटवर्थ की 26.3% ही बनती है। अब शुक्रवार का अभ्यास…
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