सिद्धांत की बात है, व्यवहार में बेअसर

रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर रिजर्व बैंक हमारे बैंकों को एकाध दिन के लिए धन उपलब्ध कराता है, जबकि रिवर्स रेपो वह ब्याज दर है जो रिजर्व बैंक अपने पास बैंकों द्वारा रखे गए अतिरिक्त धन पर अदा करता है। जब सिस्टम में नकदी का प्रवाह ज्यादा रहता है तो रिजर्व बैंक ब्याज दर बढ़ाकर उसे घटाता है और जब कम रहता है तो ब्याज दर घटाकर उसे बढ़ाता है। माना जाता है कि ब्याज दर बढ़ाने या धन महंगा करने से माल व सेवाओं को खरीदने से लोगबाग दूर भागेंगे और माल व सेवाओं की उपलब्धता या सप्लाई बढ़ जाएगी। इससे उनके दाम घट जाएंगे। नतीजतन, मुद्रास्फीति या महंगाई घट जाएगी। लेकिन क्या अपने यहां सिद्धांत की यह बात सचमुच व्यवहार में असर दिखा पाएगी? अब मंगलवार की दृष्टि…

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