भारत में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां कभी न कभी किसी रिश्तेदार, दोस्त या यूट्यूब गुरु ने यह दावा न किया हो कि यह स्टॉक पांच गुना जाएगा, यह अगला मल्टीबैगर है, अभी खरीद लो, वरना ज़िंदगी भर पछताओगे। इन दावों में इतना आत्मविश्वास होता है कि सुनने वाला खुद को अगले कुछ वर्षों में करोड़पति के रूप में देखने लगता है। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि ऐसे सपने सबसे ज़्यादा वही लोगऔरऔर भी

वॉरेन बफेट जैसे धुरंधर तक हमेशा सही नहीं होते तो हम-आप किस खेत की मूली हैं। अक्सर लगातार ट्रेड सही पड़ने के बाद हम बम-बम करने लगते हैं। गुमान हो जाता है कि हम गलत नहीं हो सकते। घाटा मारता है तो उस ट्रेड से निकलने के बजाय पोजिशन बढ़ाते जाते हैं। होश तब आता है जब सारा मुनाफा उड़नछू हो जाता है। याद रखें, बाज़ार में अतिविश्वास हमेशा आत्मघाती होता है। चलिए, परखें गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

देश पर लगता है कि डेरिवेटिव ट्रेडिंग का जुनून सवार है। आपको यकीन नहीं आएगा कि वित्त वर्ष 2001-02 से 2012-13 के बीच के ग्यारह सालों में इक्विटी फ्यूचर्स व ऑप्शंस (एफ एंड ओ) में रोज़ का औसत टर्नओवर 71.18 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ता हुआ 420 करोड़ से 1,55,048 करोड़ रुपए पर पहुंच चुका है। अभी कल, 18 अक्टूबर 2013 को एनएसई के एफ एंड ओ सेगमेंट का टर्नओवर 1,67,558 करोड़ रुपए रहाऔरऔर भी

दुनिया के सबसे प्रसिद्ध निवेश वॉरेन बफेट ने कल ही अमेरिका में ऋण सीमा पर मची जिस तनातनी को जनसंहार का राजनीतिक हथियार कहा था, उसका संकट अब टल चुका है। अमेरिकी नेता सारी दुनिया को संकट में डालने का जोखिम उठा भी नहीं सकते थे। इसलिए संसद के दोनों सदनों सीनेट व प्रतिनिधि सभा ने ऋण सीमा को बढ़ाने का प्रस्ताव पास कर दिया। राष्ट्रपति ओबामा ने इस पर मोहर भी लगा दी है। अब आगे…औरऔर भी

साल भर पहले हमने यहीं पर पॉलि मेडिक्योर में निवेश की सलाह दी थी। तब उसका शेयर 240 के आसपास था। अभी 14 मई को 574.85 का शिखर छूने के बाद फिलहाल 512.50 रुपए पर है। 100% से ज्यादा रिटर्न दिलानेवाली ऐसी तमाम सलाहें तब मुफ्त हुआ करती थीं। लेकिन खुली मुठ्ठी में रखे हीरे का मूल्य लोगों ने नहीं समझा तो मुठ्ठी बंद करनी पड़ी। आज ऐसी कंपनी जो सीधे वॉरेन बफेट से ताल्लुक रखती है।औरऔर भी

कभी सन्नामी अंतरराष्ट्रीय सलाहकार फर्म मैकेंजी के सरगना और गोल्डमैन सैक्श से लेकर प्रॉक्टर एंड गैम्बल व अमेरिकन एयरलाइंस जैसी बड़ी कंपनियों के निदेशक रह चुके अनिवासी भारतीय रजत गुप्ता की इज्जत का फालूदा बन चुका है। बुधवार को देर शाम अमेरिका की एक जिला अदालत ने उन्हें ‘धोखेबाज और बेईमान’ करार देते हुए दो साल की कैद और 50 लाख डॉलर जुर्माने की सज़ा सुना दी। फैसले के मुताबिक रजत गुप्ता की कैद 8 जनवरी 2013औरऔर भी

इसमें कोई दो राय नहीं कि हम सभी अभी सीखने के दौर में हैं और यह दौर लंबा खिंचेगा। सीखने का मतलब होता है कि पहले उस जड़ता को तोड़ना जो सालोंसाल में हमारे भीतर जड़ बना चुकी है। यह अपने-आप नहीं निकलती। निरंतर रगड़-धगड़ से इसे निकालना पड़ता है। इसका कोई शॉर्ट कट नहीं है। उसी तरह जैसे शेयर बाजार में सुरक्षित चलनेवाले आम निवेशकों के लिए कोई शॉर्ट टर्म नहीं होता। दुनिया के सबसे कामयाबऔरऔर भी

हर कोई अधीर है। किसी को धैर्य नहीं। फटाफट नोट बनाने की पिनक है। दो-चार साल क्या, लोगबाग दो-चार महीने भी इंतजार करने को तैयार नहीं हैं। जो लोग लांग टर्म हैं, वे एफडी और पीपीएफ में लांग टर्म हैं। शेयर बाजार में तो वे भी शॉर्ट टर्म हैं। लोग कहने लगे हैं कि वॉरेन बफेट का जमाना लद गया। दुनिया का यह सबसे कामयाब निवेशक भी अपनी सोच बदल रहा है। मसलन, पहले बफेट टेक्नोलॉजी शेयरोंऔरऔर भी

अब निवेश के लिए मर चुका है लांग टर्म। लद चुका है लांग टर्म निवेश का ज़माना। आज का दौर खटाखट नोट बनाने का है। रुझान पकड़कर समझदारी से ट्रेडिंग करने का। बाजार चाहे गिरे, या बढ़े। बनाइए नोट खटाखट। दोनों ही हाल में कमाई। दोनों हाथों में लड्डू और सिर कढ़ाई में। जी हां, ऑनलाइन ट्रेडिंग एकेडमी का यही दावा है। उसका कहना है कि वह आपको हफ्ते भर में ऐसी ट्रेनिंग दे देगी कि आपऔरऔर भी

धीरे-धीरे साफ होता जा रहा है कि सब शेयरों को थोक के भाव एक ही तराजू में नहीं तौला जा सकता। उसी तरह जैसे सब धान पाइस पसेरी नहीं तौलते। लांग टर्म या दो से दस साल के लिए अलग, मीडियम टर्म या दो महीने से दो साल तक के लिए अलग, शॉर्ट टर्म या हफ्ते दस दिन से दो महीने तक के लिए अलग और एकाध दिन की ट्रेडिंग के लिए अलग। फंडामेंटल्स के आधार परऔरऔर भी