वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में नाकामी की पहली वजह यह है कि किताबों, वेबसाइटों व क्लासेज़ में हमें पांरपरिक टेक्निकल एनालिसिस सिखाई जाती है। बताया जाता है कि जब हर कोई खरीद रहा हो, तब खरीदो। जब सभी बेच रहे हों, तब बेचो। हमें भीड़ की भेड़चाल में धकेल दिया जाता है। जब भाव चढ़ चुका होता है, खबर जज्ब हो चुकी होती है, तब हम सौदा करते हैं तो फायदा कैसे होगा? अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

इतना ज्ञान बिखरे होने के बावजूद अधिकांश लोग अपना वित्तीय लक्ष्य हासिल करना तो दूर, उसके पास तक नहीं फटक पाते। आखिर क्यों? कामायनी में जयशंकर प्रसाद लिखते हैं: ज्ञान दूर कुछ क्रिया भिन्न है, इच्छा क्यों पूरी हो मन की; एक दूसरे से मिल न सकें, यह विडम्बना है जीवन की। विफलता की एक वजह निश्चित रूप से ज्ञान और कर्म का फासला है। लेकिन ट्रेडिंग में इसकी दो खास वजहें हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

कयासबाज़ी से कोई मुक्त नहीं। वित्तीय बाज़ार में दांव लगाने को बहुत कुछ है तो कयास लगानेवाले बहुतेरे हैं। व्यक्ति ही नहीं, कंपनियां, बैंक व संस्थाएं तक अंदाज़ लगाती रहती है। इस बाज़ार में कमाना इतना आसान लगता है कि हर कोई छलांग लगाने को आतुर है। उनकी इस लालच का फायदा उठाने के लिए सैंकड़ों किताबें व हज़ारों इंटरनेट वेबसाइट सामने आ चुकी हैं। फिर भी बाज़ी हाथ से निकल जाती है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार आगे कहां जानेवाला है, इस पशोपेश में रोजमर्रा ट्रेड करने वालों से लेकर लंबे समय के निवेशक तक बराबर लगे रहते हैं। अगली दो तिमाहियों में भारत का जीडीपी क्या होने जा रहा है? नोटबंदी उसे कितनी चोट पहुंचाएगी? अमेरिक का फेडरल रिजर्व 13-14 दिसंबर को ब्याज दर कम से कम 0.25% तो बढ़ा ही देगा! इन सारी चीज़ों पर हमारा कोई वश नहीं। फिर भी हम जमकर कयासबाज़ी करते रहते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

हमें धंधेबाज़ नहीं बनना है। न ही उनके जितना नीचे गिरना आम हिंदुस्तानी के लिए आसान है। हमें बुद्धत्व हासिल करने वाला ऐसा प्रोफेशनल ट्रेडर बनना है जिसे अपनी सीमाओं और वित्तीय बाज़ार के स्वरूप को लेकर किसी किस्म का कोई मुगालता न हो। हम एक बार में एक या आधा कदम ही चलें। न डरें, न दुस्साहस करें। न शिकार बनें, न किसी का शिकार करें। किताबों और व्यवहार से सीखते जाएं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

अपने बाज़ार में दो तरह के प्रोफेशनल ट्रेडर सक्रिय हैं। एक वे जो वित्तीय बाजार के अब तक ढूंढे गए नियमों की गहरी अंतर्दृष्टि रखते हैं, जिन्होंने अभ्यास से एक तरह का बुद्धत्व हासिल कर लिया है और कम से कम जोखिम में अधिक से अधिक फायदा कमाने के सौदे चुनते हैं। दूसरे तरह के प्रोफेशनल ट्रेडर धंधेबाज़ है। वे प्रवर्तकों और ऑपरेटरों से मिलकर झुनझुना बजाते हैं और गंदा खेल खेलते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

रिटेल ट्रेडर जब तक प्रोफेशनल ट्रेडर की तरह सोचते और काम नहीं करते, तब तक वे औरों का शिकार बनते रहेंगे। बाज़ार के घाघ उनकी लालच, अस्थिरता, अज्ञान व सहजता का फायदा उठाते रहेंगे। वैसे, प्रोफेशनल ट्रेडर बनना कोई मुश्किल नहीं है। उसी तरह जैसे साइकिल, कार या ट्रक को चलाने में शुरू में कठिनाई आती है, पर बाद में आसान हो जाता है। नियम समझें, तब मैदान में उतरें और अभ्यास करें। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

प्रोफेशनल हर बात पर उछलते नहीं। हर खबर पर प्रतिक्रिया नहीं दिखाते। वे जानते हैं कि कहां तक उनका कितना वश चलेगा। वे निर्णय लेते हैं। गेंद माफिक हुई तो ठोंकते हैं। अन्यथा, छोड़ देते हैं। दो-चार साल बाजार में रहने के बाद वे भावनाओं के वशीभूत नहीं होते। इसलिए बाज़ार कभी उनसे नहीं खेल पाता, वे बाज़ार से खेलते हैं। वे बाज़ार की ताकत जानते हैं, इसलिए उससे जबरन पंगा नहीं लेते। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

हाथी को महावत ही संभाल पाता है। आम इंसान पास फटक जाए तो हाथी शायद उसे रौंद डाले। शेयरों की ट्रेडिंग में मुंह उठाकर कूद पड़े रिटेल ट्रेडरों का यही हाल होता है। कहावत बन जाती है कि यहां तो 95% लोग कमा ही नहीं सकते। लेकिन प्रोफेशनल ट्रेडर इसी बाज़ार से कमाते हैं। घर-परिवार चलाने के साथ ही भरपूर मजे करते हैं। मन करने पर देश-विदेश की सैर करने निकल पड़ते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

हम अपनी सोच सही कर लें तो शेयर बाज़ार हमें कभी निराश नहीं करेगा। यहां न ट्रेडिंग और न ही लंबे निवेश में अधीरता चलती है। सीधी-सी बात है कि भयंकर डर व दुविधा की स्थिति में बाज़ार से दूर रहना चाहिए। चार दिन में बाज़ार खत्म नहीं होने जा रहा। वो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता जाएगा। याद रखें, बाज़ार तभी मूर्खों की तरह बर्ताव करने लगता है जब लोग मूर्खता में सौदे करते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी