सामने बेचनेवाला या खरीदनेवाला कौन है और क्या वह भावना में बहकर सौदे कर रहा है या तर्क के चलते? यह सवाल आपको वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग का कोई सौदा करने से पहले खुद से ज़रूर पूछना चाहिए। यह हकीकत कभी नज़रअंदाज़ न करें कि बाज़ार में भावना से काम करनेवाले हमेशा तर्क से काम करनेवालों के लिए स्थाई कमाई का ज़रिया बने रहते हैं। तय करें कि आपको कैसे काम करना है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार का निवेश ज़ीरोसम गेम नहीं है। उसमें विक्रेता और खरीदार, दोनों का फायदा संभव है क्योंकि बीच में समय आकर निवेश का मूल्य बढ़ा सकता है। लेकिन शेयरों या वित्तीय बाज़ार की किसी भी ट्रेडिंग में बेचनेवाले का नुकसान खरीदनेवाले का फायदा या इसका उल्टा होता है। फिर भी घाटा खाने से कोई सबक नहीं सीखता और बाज़ार सदियों से चलता ही जा रहा है। इसकी मनोवैज्ञानिक वजह क्या है आखिर? अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार अगर सही तरीके से काम करे तो यह अद्भुत व्यवस्था है। यहां बेचनेवाले का फायदा होता है और खरीदनेवाले का भी। विक्रेता को माल या सेवा के बदले नोट मिलते हैं, जबकि खरीदार को नोट के बदले मूल्य मिल जाता है। उसने खर्च किए गए नोटों से कहीं ज्यादा उपयोगिता और काम की चीज़ मिल जाती है। लेकिन क्या यही नियम शेयर बाज़ार पर भी लागू होता है? अब नए संवत के पहले सोमवार का व्योम…औरऔर भी

ज़िंदगी कोई आलू का पराठा नहीं कि किसी ने बनाया और आप खा गए। अर्थव्यवस्था भी इतनी पालतू नहीं कि सरकार ने कहा और वो उछलने लग जाए। बराबर ऐसा कुछ आता रहता है कि पुराना मिटकर नए में समा जाता है। नया पुराने को समेट कर आगे बढ़ता रहता है। इसलिए निवेश और उससे जुड़ी सोच में भी बराबर नयापन लाते रहना चाहिए। नए संवत 2074 का यही संदेश है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

संवत 2073 बीत गया। नया संवत 2074 शुरू हो रहा है। सभी शुभलाभ के लिए शुभ शुरुआत की कामना रखते हैं। यह बहुत अच्छी बात है और सहज मानव स्वभाव का हिस्सा है। लेकिन वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में जहां हर दिन नहीं, हर पल हालात व भाव बदलते हों, वहां क्या कोई शुभ शुरुआत अपने-आप में पर्याप्त हो सकती है? यहां तो बराबर ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’ वाली स्थिति रहती है। इसी फ्रेम में हमें मुहूर्तऔरऔर भी

ट्रेडिंग में सफलता के लिए ज़रूरी आत्म अनुशासन का 7वां व आखिरी कदम है अभ्यास। कोई भी हुनर किताबों से नहीं, बल्कि अभ्यास से सीखा जाता है। द्रोणाचार्य नहीं मिले, लेकिन एकलव्य अभ्यास के दम पर अर्जुन से भी बड़ा धनुर्धर बन गया। हर किसी को अपना खाना खुद पचाना होता है, उसी तरह ज्ञान को व्यवहार में खुद उतारना पड़ता है। शुरुआत में थोड़ी पूंजी, थोड़ा रिस्क। ट्रेडिंग पूंजी को बचाकर चलें। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

ट्रेडिंग में सॉफ्टवेयर कौन-सा इस्तेमाल करना है? आपका ब्रोकर चार्टिंग का जो सॉफ्टवेयर देता है, क्या वह पर्याप्त है या आपका काम बीएसई व एनएसई की साइट पर मिल रहे मुफ्त चार्ट से चल जाता है? टेक्निकल एनालिसिस के कौन-से इंडीकेटर इस्तेमाल करने हैं? एंट्री, एक्जिट व स्टॉप लॉस का क्या सिस्टम अपनाना है? पक्का कर लें कि आपने सिस्टम में संस्थाओं की मांग व सप्लाई के संकेत ज़रूर शामिल किए गए हों। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

ट्रेडिंग के मकसद का मुख्य फ्रेम, उसके भीतर लक्ष्य, फिर सफलता का विज़न व बुद्धि के इस्तेमाल पर ज़ोर। आत्म अनुशासन के इन चार कदमों के बाद पांचवां कदम है अपने ट्रेडिंग सिस्टम के लिए सारा हार्डवेयर चौकस बनाने में जुट जाना। कहां बैठेंगे, सुबह या शाम कितना समय लगाना है, लैपटॉप कौन-सा होगा, नेट कनेक्शन किसका लेना है, किस ब्रोकर की सेवा लेनी है? इन सारे मसलों को कायदे से सुलझा लें। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

पानी ऊपर से नीचे बहता है। लेकिन बचत हमेशा कम से ज्यादा रिटर्न की तरफ बहती है। इधर ब्याज दर घटने पर लोगबाग एफडी से धन निकालकर म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों में लगाने लगे हैं। शेयरों की ज्वाला पर भी पतंगे टूटे पड़े हैं। इससे म्यूचुअल फंडों और ब्रोकरों की कमाई बढ़ गई है। लेकिन निवेशकों की कमाई अंततः बढ़ पाएगी या 2008 जैसा हश्र होगा? यह अहम सवाल है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अपनी कमियों और बाज़ार के सच को समझने की दृष्टि हासिल करने के बाद परखें कि यहां कौन सफल होते हैं और कितने लाख कोशिशों के बावजूद पिटते रहते हैं। दोनों से सीखें। लेकिन किसी रोल मॉडल या अकाट्य मंत्र के चक्कर में न पड़ें। हां, बाज़ार के दिग्गजों को ज़रूर पढ़ना चाहिए। मोटे तौर पर समझ लें कि भावनाओं व आवेग को किनारे रख बुद्धि का जितना इस्तेमाल करेंगे, उतना सफल होंगे। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी