चेतन व अवचेतन मन के बीच की लौह दीवार को भेदने की बड़ी व्यावहारिक विद्या गौतम बुद्ध ने वैदिक शिक्षाओं को मथने के बाद गहन आत्मसाधना से खोजकर निकाली थी। इस विपश्यना साधना ने तब आम से लेकर खास, सभी लोगों का भला किया। लेकिन करीब 2500 साल पहले पुरोहितों ने इसे गायब कर दिया। वह विद्या अब भारत में वापस आ गई है। ट्रेडरों के लिए यह विद्या बड़े काम की है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

राजनीति सेवाभाव से करो तो उसमें त्याग ही त्याग है। लेकिन स्वार्थ के लिए करो तो आज हमारे देश का सबसे शानदार धंधा है। इतना जबरदस्त रिटर्न किसी बिजनेस में भी नहीं। फिर भी राजनीति को पांच साल के चक्र से गुजरता पड़ता है। इसी तरह कपास, सीमेंट, स्टील, तांबा व क्रूड ऑयल जैसे हर जिन्स से जुड़े उद्योग और उनमें सक्रिय कंपनियों को भी चक्र से गुजरना पड़ता है। आज ऐसे ही उद्योग की एक कंपनी…औरऔर भी

ट्रेडिंग इसलिए कर रहे हैं ताकि बाज़ार से कमा सकें। मगर पूंजी ही न रही तो कमाएंगे कैसे और किससे? इसलिए अपनी ट्रेडिंग पूंजी बचाकर चलनी है, यह लक्ष्य बहुत साफ होना चाहिए। इस लक्ष्य से जो भी भावनाएं भटकाती हैं, उनके प्रति आप जितना सचेत होते जाएंगे, पूर्वाग्रहों से मुक्त होते जाएंगे, उतना ही आपका निर्णय तर्क व तथ्यपरक होता जाएगा। बाकी बचा बाज़ार का जोखिम तो धीरे-धीरे उसे भी साध लेंगे। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

नकारात्मक विचारों, मान्यताओं और भावनाओं की फांस से निकलकर जब आप जो जैसा है, उसे यथाभूत देखने में समर्थ हो जाते हो तो आपको अपने कर्म की कमियां खुद ही दिखने लग जाती हैं। तब प्रतिक्रिया करने के बजाय आप क्रिया को अधिक महत्व देते हो। दूसरों या हालात पर तोहमत लगाने के बजाय अपनी कमियों को दूर करने लगते हो ताकि बाज़ार की प्रतिस्पर्धा में आप हर उन्नीस पर बीस पड़ सकें। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

कल और कल के बीच झूलने के बजाय आप जब आज और अभी में जीने लगते हो तब तमाम गिले-शिकवों, परेशानी और बिखरे-बिखरे रहने की स्थिति से मुक्त हो जाते हो। तब आपका ध्यान भटकता नहीं। आप हर काम पूरा ध्यान लगाकर करते हो और सार को पकड़कर थोथी चीजें उड़ा देते हो। तब आपका ज़ोर हमेशा जमीनी हकीकत और वास्तविकता को जानने पर रहता है। इसका लाभ ट्रेडिंग में भी मिलता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

आती-जाती सांस पर ध्यान लगाने से मन का भटकाव थमता जाता है। एहसास होने लगता है कि अतीत की यादों या भविष्य के ख्वाबों में भटकना मन की आदत बन चुकी है। धीरे-धीरे आप उसे खींचकर वर्तमान में लाते हो। फिर वर्तमान में जीने की आदत के साथ-साथ मन स्थितप्रज्ञ बनने लगता है, आपके विचार व भावनाओं में संतुलन आने लगता है और जो जैसा है, उसे आप वैसा ही देखने लगते हैं। अब मंगलवार की बुद्धि…औरऔर भी

अवचेतन मन में बैठी नकारात्मक धारणाओं, विचारों और भावनाओं से समय रहते कैसे निजात पा ली जाए, यह बड़ा अहम मसला है। उनसे मुक्ति न पाई गई तो वे बड़ी घातक हो सकती हैं। इसे रोकने का पहला उपाय है कि हम अपने अंतर्मन के प्रति सचेत हो जाएं। पता लगाएं कि हमारे अंदर जाने-अनजाने क्या-क्या चलता रहता है। आंख मूंदने से यह काम नहीं होगा। हां, आनापान ध्यान इसका कारगर तरीका है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार का हाल इस समय बड़ा विचित्र है। सेंसेक्स ऐतिहासिक शिखर पर है। लेकिन उसमें शामिल 30 में से 22 कंपनियों के शेयर दबे पड़े हैं। कुछ दिनों पहले स्मॉल-कैप सूचकांक 14 महीनों के न्यूनतम स्तर पर चला गया। इनमें से कुछ स्टॉक तो 90% तक गिर गए। ऐसे माहौल में अच्छी कंपनियों चुनने का रास्ता कतई सीधा-सरल नहीं हो सकता। लेकिन नज़र वालों के लिए मौके कम नहीं हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

हमारे अवचेतन दिमाग में गहरे पैठी मान्यताओं व धारणाओं से हमारे सचेत विचारों की लड़ी फूटती है और इन्हीं विचारों से भय, लालच, क्रोध, चिंता व संशय जैसी भावनाएं पैदा होती हैं। जब इस तरह की भावनाएं सक्रिय हो जाती हैं तो वे हमसे ऐसे काम करवाती हैं जिनके बारे में हमने सोच रखा था कि वैसा नहीं करेंगे। ट्रेडर का सारा अनुशासन टूट जाता है और वो गलतियां करता चला जाता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

रिजर्व बैक ने दो महीने में दूसरी बार रेपो या बैंकों को दिए जानेवाले अल्पकालिक ऋण पर ब्याज 0.25% बढ़ाकर 6.50% कर दी। इसका कितना असर उद्योग से लेकर आम लोगों के ऋण के महंगा होने पर पड़ेगा, यह महज कयासबाज़ी है क्योंकि ऋण की कम मांग के बीच बैंक ब्याज दर बढ़ाएंगे, यह कहना मुश्किल है। शायद इसीलिए रिजर्व बैंक ने 2018-19 में जीडीपी के विकास का अनुमान 7.4% पर बनाए रखा। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी