इंफ्रास्ट्रक्चर व हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों ने कमर्शियल पेपर जैसे ऋण-प्रपत्रों में हाल में जिस तरह डिफॉल्ट किया, उससे डर लगा कि कहीं सिस्टम में नकदी का संकट न पैदा हो जाए। बैंकों के बढ़ते एनपीए का संकट पहले से था। सरकार एलआईसी पर आईडीबीआई बैंक का बोझ डाल चुकी है। वैसे, आईएल एंड एफएस में सत्यम की तरह नया निदेशक बोर्ड बना दिया गया है। पर, एलआईसी को ही उसका उद्धार करना होगा। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

बाज़ार में ज्वार-भाटे जैसे स्थिति है। निफ्टी 150 से 200 अंकों का उतार-चढ़ाव झेल रहा है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि जहां विदेशी निवेशक संस्थाएं बराबर बेच रही हैं, वहीं म्यूचुएल फंड व बीमा कंपनियों जैसी देशी निवेशक संस्थाएं बराबर खरीद रही है। इनके बीच का असंतुलन बाजार में असामान्य हलचल का सबब बन जा रहा है। ऊपर से आईएल एंड एफएस जैसी कंपनियों के डिफॉल्ट ने परेशानी बढ़ा रखी है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

हमारे शेयर बाज़ार की हालत इन दिनों डांवाडोल चल रही है। सुबह का जोश शाम तक ठंडा पड़ जाता है। दरअसल अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति ने इधर बाज़ार को ज़मीन पर उतारना शुरू कर दिया है। लगता है कि जैसे उस पर नकारात्मक तत्वों की साढ़े साती सवार हो गई हो। इस साढ़े साती के काल्पनिक नहींं, सचमुच के कारक हैं, जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्हें सुलझाना भी कतई आसान नहीं। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

लगातार गिरता रुपया, कच्चे तेल व पेट्रोलियम पदार्थों के बढ़ते दाम, विदेशी निवेशकों का निकलते जाना। इन प्रतिकूल स्थितियों से घबराया शेयर बाज़ार क्या जल्दी संभल पाएगा? सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को ऋण देनेवाली आईएल एंड एफएस जैसी बड़ी कंपनी का संकट क्या गुल खिला सकता है? स्मॉंल और मिडकैप कंपनियों के शेयरों का गिरना कब रुकेगा? इस धुंध भरे महौल में अच्छी कंपनियां भी पीटी जा रही है। तथास्तु में आज इन्हीं में से एक दमदार कंपनी…औरऔर भी

ज्ञान को सफलता तक कौशल पहुंचाता है और कौशल के लिए अभ्यास ज़रूरी है। अभ्यास भी जहां-तहां हाथ मारने का नहीं, बल्कि अनुशासन व नियम में बंधकर चलने का। जिस तरह जीवन सांसों की डोर से बंधा है, उसी तरह वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग भावों की लय-ताल से बंधी है। भावों की यह डोर पकड़कर हम अभ्यास करते हैं। धीरे-धीरे भावों का पैटर्न और रुख बदलने का ढर्रा समझ में आने लगता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

लंबे निवेश के लिए फंडामेंटल एनालिसिस का सहारा लेना चाहिए, टिप्स का कभी नहीं। ट्रेडिंग के लिए टेक्निकल एनालिसिस की मूल बातों को जान लेना चाहिए। लेकिन बाज़ार में देशी व विदेशी संस्थाओं और नवसिखिया रिटेल ट्रेडरों का संतुलन समझना ज़रूरी है ताकि हम पतंगों की तरह दीए की लौ पर जल जाने के अंजाम से बच सकें। संस्थाओं की राह ही सही राह है। ट्रेडिंग में सफलता की बुनियादी समझ यही है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

बाज़ार में खिलाड़ियों के खेल और संतुलन को जानने के साथ ही यह बात मन में कहीं गहरे बैठा लेना चाहिए कि  ट्रेडिंग और निवेश मूलतः प्रायिकता के खेल हैं। यहां कुछ भी पक्का नहीं। अनुमान व संभावना चलती है। आंख मूंद छलांग लगाने से सबसे अच्छा पाने की उम्मीद आत्मघाती है। शेयर बाज़ार में अच्छी तरह गिना व समझा गया रिस्क लिया जाता है, जिसमें रिटर्न की प्रायिकता कभी शत-प्रतिशत नहीं होती। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग व निवेश से जुड़े ज्ञान को कई हिस्सों में बांटा जा सकता है। सबसे पहले तो यह जानना ज़रूरी होता है कि वित्तीय बाज़ार काम कैसे करता है। यहां कौन-कौन से मुख्य खिलाड़ी सक्रिय हैं और रिटेल ट्रेडरों व निवेशकों से लेकर म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों, बैंकों, प्रोफेशनल ट्रेडरों, ब्रोकिंग हाउसों व विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की क्या भूमिका व वजन होता है। उनके ऑर्डर फ्लो को समझना होता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

ज्ञान पढ़कर पाया जा सकता है। लेकिन कौशल तो केवल अभ्यास से हासिल किया जा सकता है। यह अभ्यास किसी गुरु की देखरेख में हो तो सबसे अच्छा है। लेकिन ज़माने के सारे गुरु जब स्वार्थों से बंधे हों, तब कौशल में पारंगत होने के लिए एकलव्य ही बनना पड़ता है। नियम और अनुशासन गुरु का काम करते हैं, जबकि उनका पालन करते हुए निरंतर अभ्यास से हम हुनरमंद बनते चले जाते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

दुनिया के सफलतम निवेशक वॉरेन बफेट का यह कहना शेयर बाज़ार का नीति-वाक्य बन चुका है कि जब सभी डर कर बेच रहे हों, तब लालची बन खरीद लेना चाहिए और सभी लालच में फंसे हों, तब बेचकर निकल लेना चाहिए। ऐसा सटीक मौका कभी-कभार ही मिलता है। लेकिन अपने यहां बीते हफ्ते घबराहट में चली बिकवाली ने लालची बनने के कुछ ऐसे ही मौके पेश कर दिए हैं। आज तथास्तु में उन्हीं में से एक मौका…औरऔर भी