इस सेटलमेंट में अब केवल एक दिन बचा है। लेकिन बाजार में और बढ़त आ सकती है केवल इसलिए कि अभी सौदों की स्थिति बहुत ही ज्यादा ओवरसोल्ड वाली है। कल का डर आपकी सोच के दरवाजे बंद कर देता है और आप एक अच्छा मौका गंवा देते हैं। वोलैटिलिटी सूचकांक, इंडिया वीआईएक्स का 20 फीसदी के सामान्य स्तर से एकबारगी 46 फीसदी पर पहुंच जाना ही दिखाता है कि बाजार पर किस हद तक डर छायाऔरऔर भी

टेक्निकल चार्ट के ग्राफ नीचे-नीचे डूब गए तो निवेशकों का भरोसा भी डूब रहा है। पूरे बाजार में डर छा गया है। खरीदार कोई भी नया सौदा करने से डर रहे हैं। निवेशक नफा-नुकसान जो भी, उसी पर बेचकर निकल लेना चाहते हैं। उन्हें बिजनेस चैनलों पर जिस तरह हर तरफ हताशा-निराशा दिखाई जा रही है, उसके अलावा कुछ नहीं दिख रहा। यूरोप के बाजार हर दिन खुलने पर धराशाई हो रहे हैं। अमेरिकी बाजार इन्हीं केऔरऔर भी

बाजार की दिशा का अनुमान लगाने में हम ज्यादा गलत नहीं थे। हां, शुक्रवार को हम गलत निकले क्योंकि वैश्विक बाजारों का असर हावी हो गया। लेकिन सोमवार के रुझान के लिए वैश्विक कमजोरी को वजह बताने का क्या तुक है? जैसा मैं हमेशा से मानता रहा हूं कि जब बाजार अपनी तलहटी पर होता है तभी चार्ट के धंधे और टेक्निकल सलाह वाले लोग बिक्री की सलाह दे डालते हैं। और, फिर वैश्विक बाजारों के असरऔरऔर भी

आज का दिन स्टॉप लॉस के नाम रहा। निफ्टी 5200 अंक के नीचे पहुंचा तो हर तरफ सौदे काटने का सिलसिला चल निकला। चीन ने ब्याज दरें बढ़ा दी थीं और ऑस्ट्रेलिया ने मेटल के दाम। इसलिए दुनिया के बाजारों में पहले से ही थोडी कमजोरी का आलम था। बाजार को तब सदमा-सा लग गया जब ग्रीस ने कह दिया कि उसके लिए 110 अरब यूरो की रकम शायद काफी न पड़े। हमारे लिए इसका क्या मतलबऔरऔर भी

आप में और मुझ में क्या अंतर है? मैं जो हो रहा है, उसे देखता हूं, समझता हूं और उसके हिसाब से सलाह देता हूं, जबकि आप सलाह मिलने के बाद भी वही करते हैं जो स्क्रीन बताता है। थोड़े में कहूं तो आपको अपने ही ऊपर भरोसा नहीं है। जब बाजार 300 अंक गिर गया तो आप निचले भावों पर खरीद के बजाय बाजार के दबाव में आ गए और घाटा खाकर भी शेयर बेच डाले।औरऔर भी

बाजार ने आज सुबह से ही धमाचौकड़ी दिखाई। बीएसई सेनसेक्स 310.54 अंक (1.76 फीसदी) और एनएसई निफ्टी 92.90 अंक (1.75 फीसदी) गिरकर बंद हुए। सच कहूं तो बाजार के इस रवैये को देखकर मुझे जरा-सा भी अचंभा नहीं हुआ। मेरा मानना है कि न तो पुर्तगाल और न ही ग्रीस का कोई असर भारतीय बाजार पर पड़नेवाला है। बल्कि यूरोप, चीन, अमेरिका या कोरिया में जो भी गड़बड़ होगी, वह भारत के फायदे में है। मेरे इसऔरऔर भी

दुनिया के बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार आज ढीला रहा, इसलिए क्योंकि कारोबारी कल आ रहे इनफोसिस के नतीजों को लेकर कोई दांव नहीं खेलना चाहते। इतना तय है कि महज एक तिमाही में डॉलर के सापेक्ष रुपए के 12 फीसदी बढ़ जाने से भावी नजरिए को बेहतर करना या पिछले स्तर को बरकरार रखना भारी मुश्किल काम है, भले ही यह कंपनी इनफोसिस ही क्यों न हो। हमारे विश्लेषकों के मुताबिक इनफोसिस कल याऔरऔर भी

सेंसेक्स के 18,000 तक पहुंचने के आसार ने शेयर कारोबारियों के दिमाग में एक रौ जग गई है कि फटाफट-झटपट कुछ कर लेना चाहिए और वे बेचकर मुनाफा कमाने में लग गए हैं। अच्छी बात है। लेकिन बाजार को अभी लंबा चलना है क्योंकि 13 अप्रैल आने में छह दिन बचे हैं। 13 अप्रैल को इनफोसिस के नतीजों में वो कुंजी है जो बाजार की अगली मंजिल का फैसला करेगी। एचडीआईएल और डीएलएफ ऐसा तेज भाग रहेऔरऔर भी

बाजार की गति बतानेवाला बीएसई सेंसेक्स आज 17,935 अंक पर बंद हुआ। यह अब 18,000 के स्तर से कुछ ही फासले पर है। आनेवाले हफ्तों में यह 18,300 अंक के पार जा सकता है। टाटा स्टील 680 रुपए पर जा पहुंचा तो स्टरलाइट 865, सैंडुर 760, विंडसर 47, विमप्लास्ट 184, शिवालिक 33, बालासोर 28, आरडीबी 118, एसएनएल 42, जमना ऑटो 89 और एनआरबी 78 रुपए तक चला गया। बढ़त का दौर ऐसे ही चला। फिर भी बहुतऔरऔर भी

वित्त वर्ष 2009-10 गुजर गया। लेकिन यह साल जाते-जाते शेयर बाजार के निवेशकों की पूंजी दोगुनी करके गया है। अगर लिस्टेड कंपनियों के शेयर भावों को आधार बनाएं तो बाजार का पूंजीकरण अब 60 लाख करोड़ रुपए का स्तर पार गया है जो पिछले साल के स्तर से लगभग दोगुना है। हालांकि ये सारा सांकेतिक मामला है। लेकिन मानने में क्या हर्ज है कि भारतीय निवेशक पहले से दोगुने अमीर हो गए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) मेंऔरऔर भी