रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) में आई करीब तीन फीसदी की गिरावट ने बाजार को थोड़ा दबाकर रख दिया। फिर भी चुनिंदा स्टॉक्स, खासकर बी ग्रुप के स्टॉक्स में बढ़त जारी है। गौर करने की बात यह है कि पिछले छह महीनों में दो चीजें हुई हैं। एक, जो प्रवर्तक ऊंचे मूल्यों पर भी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचने को तैयार नहीं थे, उन्हें अब समझ में आ गया है कि फंड जुटाने का सबसे सस्ता व अच्छा तरीकाऔरऔर भी

कंपनियों के नतीजों का मौसम खत्म होने को है। अब तक तस्वीर यह बनी है कि जहां इनफोसिस और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी तमाम बड़े स्तर की कंपनियां बाजार की अपेक्षाओं को पूरा करने में नाकाम रही हैं, वहीं पोलारिस, एचसीएल टेक्नो व हिंदुस्तान जिंक जैसे मध्यम स्तर की कंपनियों ने उम्मीद के बेहतर नतीजे हासिल किए हैं। कुल मिलाकर कॉरपोरेट क्षेत्र का लाभार्जन बीते वित्त वर्ष 2010-11 में पहले से 20 फीसदी ज्यादा रहेगा। लेकिन चालू वित्तऔरऔर भी

सिर्फ बाजार भाव से नहीं पता चलता है कि कोई शेयर सस्ता है या नहीं। भाव बढ़ जाने के बावजूद वह सस्ता हो सकता है या महंगा। इसका पता इससे चलता है कि उसके मूल्यांकन का स्तर क्या है। और, मूल्यांकन का पैमाना है पी/ई अनुपात। यानी, बाजार भाव को उसके सालाना ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) से भाग देने पर निकला अनुपात। आप कहेंगे कि यह तो अलग-अलग कंपनियों की बात हुई। कंपनियों के किसी सेट काऔरऔर भी

बाजार पर तेजी का जुनून इस कदर सवार है कि कच्चे तेल के बढ़ते दाम, मुद्रास्फीति और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को डाउनग्रेड किया जाना भी उसे रोक नहीं पा रहा। आज लगता है कि वे ट्रेडर व निवेशक कितने बौड़म थे जो सेंसेक्स के 17,000 के स्तर पर कच्चे तेल, मुद्रास्फीति और वैश्विक चिंताओं का भय दिखाकर हमें समझा रहे थे कि यह 14,000 तक गिर जाएगा। ऐसा न कभी होना था, न ही हुआ क्योंकि लाभार्जन केऔरऔर भी

खरबपति उद्योगपति मुकेश अंबानी की अगुवाई वाला रिलांयस इंडस्ट्रीज समूह अब वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उतरने की योजना बना रहा है। लेकिन वह इसके लिए गैर पारंपरिक तरीके अपना सकता है। वित्तीय सेवाओं में अभी तक मुकेश के छोटे भाई अनिल अंबानी सक्रिय हैं। बंटवारे के समय शुरूआती व्यवस्था यही थी कि कोई भाई दूसरे के कारोबारी हलके में नहीं जाएगा। लेकिन नए करार के बाद यह शर्त खत्म हो गई है। उल्लेखनीयऔरऔर भी

बड़े ही दुख की बात है कि निवेशकों व ट्रेडरों को हमेशा इस बाजार में बलि का बकरा बनाया जाता है। एक बुरा नतीजा आया नहीं कि एफआईआई स्टॉक्स को बाजार भाव से 10 फीसदी नीचे पर बेचना शुरू कर देते हैं। हालांकि मैं अभी तक इस बात को लेकर अचंभित रहा हूं कि इनफोसिस कैसे अपने मूल्यांकन को 30 के पी/ई अनुपात पर टिकाए हुए है। इस दौरान हमें अपनी रिसर्च डेस्क से पर्याप्त संकेत भीऔरऔर भी

सेंसेक्स और निफ्टी की बात करें तो बाजार सुबह से दोपहर तक गिरता रहा, लेकिन अंत आते-आते संभल गया। फिर भी बीएसई के मिड कैप और स्मॉल कैप सूचकांक क्रमशः 0.79 फीसदी और 1.38 फीसदी बढ़ गए। एक बात ध्यान रखें कि बाजार में करेक्शन यानी गिरावट आए या न आए, कंपनी विशेष के बारे में कोई नई सूचना लानेवाली खबर उसके शेयरों के भावों को बढ़ा देगी। हम अबन ऑफशोर, बीजीआर एनर्जी, रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल), रिलायंसऔरऔर भी

जापान में हालात सामान्य होने लगे हैं। फुकुशिमा परमाणु संयंत्र के सभी छह रिएक्टरों में बिजली बहाल हो गई है। यहां से जापान में पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी और वहां की नई मांग से दुनिया में जिंसों के भाव बढ़ सकते हैं। इस बीच लीबिया पर पश्चिमी देशों के सैन्य हमलों के बाद कच्चे तेल के दाम फिर उठने लगे हैं। लेकिन यह मसला भी जल्दी ही सुलझ जाएगा। गद्दाफी लंबे समय तक खुद को बचाएऔरऔर भी

बीते हफ्ते जापान जैसा बड़ा संकट हो गया। फिर भी भारतीय बाजार ने अपनी दृढ़ता व लचीलेपन का परिचय दिया है। निफ्टी 5400 से नीचे नहीं गया। यहां तक कि शुक्रवार को भी इसने बहादुरी से 5400 पर खुद को टिकाने की कोशिश की। लेकिन भारतीय बाजार पर मंदड़ियों के एकजुट हमले और बाजार में गहराई के अभाव के चलते यह 5400 से नीचे 5373.70 पर बंद हुआ। यह जानामाना सच है कि भारत सरकार को भारतीयऔरऔर भी

बाजार एक बार फिर 5400 से 5500 की रेंज तोड़कर नीचे चला गया। निफ्टी 5367 तक जा पहुंचा और मंदड़ियों की मौज हो गई है। वे आज तीन लंबी-लंबी अफवाहें फेंकने में कामयाब रहे। एक यह कि बीजेपी विकीलीक्स के ताजा खुलासे के बाद सरकार से सदन में बहुमत साबित करने की मांग करेगी, जिसकी कोई संभावना नहीं है। दो, जापान के फंड भारत से निकलना चाहते हैं जो फिर संभव नहीं है और इसे नोमुरा सिक्यूरिटीजऔरऔर भी