दो दिन का राष्ट्रीय अवकाश। एक, रमज़ान के बाद खुशी मनाने का मौका। दूसरा, हर शुभारंभ के देव गणपति को घर बुलाने का दिन। एक त्योहार मुस्लिम का, एक हिंदू का। न जाने वो दिन कब आएगा, जब हमें अहसास ही नहीं होगा कि यह हिंदू का त्योहार है या मुस्लिम का। जैसे, आमिर, सलमान या शाहरुख को अपना मानते वक्त हमें भान ही नहीं रहता कि ये सभी मुस्लिम हैं। खैर, यह राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया हैऔरऔर भी

सरकार की नवरत्न कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) को चालू वित्त वर्ष 2011-12 की पहली तिमाही में 3080.26 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। यह घाटा साल भर पहले इसी तिमाही में हुए 1884.29 करोड़ रुपए के घाटे के डेढ़ गुने से ज्यादा है। महज एक तिमाही का यह घाटा बीते पूरे वित्त वर्ष 2010-11 में हुए 1539.01 करोड़ रुपए के शुद्ध लाभ को पचा जाने के लिए काफी है। इस घाटे की सीधी-सी वजह यह है किऔरऔर भी

वीनस रेमेडीज साफ-सुथरी बीस साल पुरानी दवा कंपनी है। कॉरपोरेट गवर्नेंस के नियमों का बखूबी पालन करती है। आठ सदस्यीय निदेशक बोर्ड के चार सदस्य स्वतंत्र निदेशक हैं। देश की 50 प्रमुख दवा कंपनियों में शुमार है। 75 से ज्यादा उत्पाद हैं। दुनिया के 60 देशों में मौजूदगी है। तीन उत्पादन संयंत्र हैं। एक पंचकुला (पंजाब) में। दूसरा बड्डी (हिमाचल प्रदेश) में। और, तीसरा जर्मनी के शहर वेयरने में। पिछले पांच सालों में बिक्री 141.35 करोड़ रुपएऔरऔर भी

रीको ऑटो इंडस्ट्रीज दोपहिया से लेकर चार-पहिया वाहनों के कंपोनेंट बनानेवाली बड़ी कंपनी है। कितनी बड़ी, इसका अंदाजा कंपनी के धारुहेड़ा, मानेसर व गुड़गांव के संयंत्रों को देखकर लगाया जा सकता है। हीरो मोटोकॉर्प से लेकर मारुति तक की बड़ी सप्लायर है। आज से नहीं, करीब पच्चीस सालों से। लेकिन 2006 से ही उसके सितारे गर्दिश में हैं। पहले मजदूरों की 56 दिन लंबी हड़ताल हुई। फिर दुनिया के वित्तीय संकट ने भारत को आर्थिक सुस्ती मेंऔरऔर भी

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां एक तरह से ठेकेदारों जैसा ही काम करती हैं। लेकिन ठेकेदार की छवि हमारे दिमाग में नेताओं तक पहुंच और सरकारी धन की लूट करनेवाले गुंडे-मवाली की ही है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुख्यात माफिया हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र शाही मूलतः ठेकेदार ही तो रहे थे। पर, इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां एकदम भिन्न व प्रोफेशनल तरीके से काम करती हैं। देश में जिस तरह इंफ्रास्ट्रक्चर की खस्ता हालत को लेकर त्राहि-त्राहि मची है, उसमें इस क्षेत्र कीऔरऔर भी

सीधी रेखा नहीं, लहरों की तरह चलते हैं शेयरों के भाव। 4 अक्टूबर 2010 को हमने पहली बार जब यूं ही चलते-चलते ग्लेनमार्क फार्मा का जिक्र छेड़ा था, तब यह 311.70 रुपए पर था। करीब दो महीने बाद 7 दिसंबर 2010 को 389.75 रुपए के शिखर पर चला गया। लेकिन करीब ढाई महीने बाद ही 28 फरवरी 2011 को 241.60 रुपए की घाटी में जा गिरा। अभी 16 मई 2011 को हमारे चक्री भाई ने जब इसेऔरऔर भी

नेशनल पेरॉक्साइड 1954 में बनी नुस्ली वाडिया परिवार की कंपनी है। नुस्ली के बेटे नेस वाडिया इसके चेयरमैन हैं। कंपनी कल्याण (महाराष्ट्र) की फैक्टरी में तीन रसायन बनाती है – हाइड्रोजन पेरॉक्साइड, सोडियम परबोरेट व पैरासेटिक एसिड बनाती है। लेकिन इसमें प्रमुख है हाइड्रोडन पेरॉक्साइड जिसमें देश का 40 फीसदी बाजार उसके हाथ में है। कंसोलिडेट आधार पर कंपनी वित्त वर्ष 2010-11 में कंपनी का ईपीएस (प्रति शेयर मुनाफा) 101.23 रुपए और स्टैंड-एलोन आधार पर 100.65 रुपएऔरऔर भी