शरीर है, तभी सब है। घर-परिवार। सुख-समृद्धि। ज्ञान-ध्यान। सबकी शुरुआत इसी से होती है और इसी के साथ इससे जुड़े हर भाव का अंत हो जाता है। बर्तन ही नहीं तो अमृत रखेंगे कहां? इसलिए सबसे पहले शरीर की शुद्धता व पात्रता जरूरी है।और भीऔर भी

शेयर बाजार किसी इलाहाबाद का मीरगंज, दिल्ली का श्रद्धानंद मार्ग या मुंबई का कमाठीपुरा नहीं है कि गए और चोंच मारकर आ गए। यहां रिश्ते चंद रातों के नहीं, सालों-साल के बनते हैं। यहां के रिश्ते एकतरफा भी नहीं होते। दोनों पक्षों को भरपूर मिलता है। न मिले तो सब कुछ टूट जाता है, सारा औद्योगिक विकास अवरुद्ध हो जाता है। यह करीब पांच सौ साल पहले उत्तरी यूरोप से शुरू हुआ वो जरिया है जिससे व्यक्तियोंऔरऔर भी

यूरोज़ोन एक ऐतिहासिक परियोजना है। भारत चाहता है कि यूरोज़ोन फले-फूले क्‍योंकि यूरोप की खुशहाली में ही हमारी खुशहाली है। यह कहना है कि हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का। फ्रांस में पर्यटन के लिए मशहूर रिविएरा इलाके के सबसे अच्छे शहर कान में हो रहे रहे जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए रवाना होने से पहले बुधवार को प्रधानमंत्री ने यह बात कही। दो दिन का यह सम्मेलन गुरुवार-शुक्रवार (3-4 नवंबर) को होना है। जर्मन चांसलर एंजेला मैर्केल,औरऔर भी

अपने घर-परिवार और अपनी नजर में तो हर कोई मूल्यवान होता है। लेकिन असली बात यह है कि समाज की नजर में आपका मूल्य क्या है क्योंकि उसी से आपकी सुख-समृद्धि और चैन का फैसला होता है।और भीऔर भी

समझ में नहीं आता इन दुखी आत्माओं का क्या करूं? एक दुखी आत्मा ने लिखा है, “हेलो! आप यहां हर वक्त लिखते हैं कि मार्केंट मजबूत रहेगा। लेकिन हर वक्त वो नीचे ही नीचे जा रहा है। आपने लिखा था कि 6200 से 7000 तक निफ्टी जाएगा। मगर ऐसा नहीं हुआ। अगर आपको सही मालूम होता तो क्यों नहीं आप सबको बोलते कि निफ्टी 4500 तक जाएगा। जब निफ्टी 6200 था तब सब अपना बेच देते औरऔरऔर भी

विद्या विनय देती हो या नहीं, लेकिन ज्ञान जरूर मुक्त करता है। पर ज्ञान व मुक्ति के अलग-अलग स्तर हैं। जो जितना मुक्त है, उतना संपन्न है। वैसे हर संपन्न व्यक्ति का मुक्त होना जरूरी नहीं।और भीऔर भी

शरीर जरूरत से ज्यादा नहीं पचा सकता। इसी तरह कोई भी शख्स अपने पास जरूरत से बहुत-बहुत ज्यादा नहीं रख सकता। उसे अतिरिक्त संपदा को सामाजिक स्वरूप देना ही पड़ता है। यही प्रकृति का नियम है।और भीऔर भी