शब्दों के बिना विचारों की कनात नहीं तनती। रिश्तों की डोर न हों तो भावनाएं नहीं निखरतीं। औरों की नज़र न हो तो अपनी गलती का एहसास नहीं होता। विराट न हो तो शून्य सालता है, सजता नहीं।और भीऔर भी

चलने के लिए पैर चाहिए और पैर हमेशा जोड़े में होते हैं। कम से कम दो और ज्यादा से ज्यादा कितने भी। एक पैर के जीव तो पेड़ बन जाते हैं। वो बढ़ते हैं और खिलते भी। लेकिन हमेशा औरों के रहमोकरम पर।और भीऔर भी