निवेश और शिक्षा
सही व काम की शिक्षा पर किया गया खर्च कभी बेकार नहीं जाता। वो तो निवेश की तरह है जिसमें अभी उठाई गई थोड़ी-सी तकलीफ बाद में बड़े आराम का आधार बन जाती है। इसलिए शिक्षा को कभी उपभोग नहीं, हमेशा निवेश मानना चाहिए।और भीऔर भी
नए की पीड़ा
सृजन व पीड़ा में अभिन्न रिश्ता है। प्रकृति ने तो सृजन की हर प्रक्रिया के साथ खुशी व उन्माद के ऐसे भाव जोड़ रखे हैं कि पीड़ा गौड़ हो जाती है। सामाजिक सृजन में इंसान को यह काम खुद करना पड़ता है।और भीऔर भी
रिश्तों के तंतु
हर सजीव वस्तु या रिश्ते का पोर-पोर बेहद बारीक तंतुओं से जुड़ा होता है। एक भी तंतु हिल जाए तो उससे उपजी तकलीफ हमें अंदर तक हिलाकर रख देती है और, तब हमें उसके होने का अहसास होता है।और भीऔर भी







