अन्यथा अनाथ हैं
2012-08-31
हम सब अपने ही नाथ हैं। खुद ही सब करना या पाना है। कहते हैं कि भगवान सभी का नाथ है। लेकिन भगवान तो महज एक मान्यता है। मन का धन है। अन्यथा तो हम सभी अनाथ हैं। कहा भी गया है कि मानिए तो शंकर हैं, कंकर हैं अन्यथा।और भीऔर भी
भावना-संभावना
2012-06-18
सिर्फ भावनाओं से कुछ नहीं हो सकता। लेकिन भावनाओं के बिना भी कुछ नहीं हो सकता। भावनाएं उस लीवर का काम करती हैं जो कम बल से ज्यादा वजन उठाने की क्षमता देता है। भावनाएं ही हमें सक्रिय बनाती हैं। अन्यथा हम यूं ही पड़े रहें।और भीऔर भी

