जिस तरह ड्रग-एडिक्ट नशे के बिना पसीना-पसीना हो जाता है, उसी तरह हम भी धन और घर की चक्की के ऐसे आदी हो जाते हैं कि उसके बिना सब सूना लगने लगता है। फुरसत हमें काटने दौड़ती है और हम उसी चक्की की ओर दौड़े चले जाते हैं।और भीऔर भी

कभी फुरसत में कुछ भी नहीं होने की कल्पना कीजिए। एकदम सन्नाटा, कोई ख्याल नहीं। है न बड़ा मुश्किल! लेकिन यह शून्य बेहद अहम है। यह शून्य ही वो आखिरी अंक है जिसकी खोज हमने की। यह न होता तो आज दुनिया ज्ञान-विज्ञान में शून्य होती।और भीऔर भी