हद की सरहद
2010-11-09
जब कभी लगता है कि अब तो हद हो गई, अति हो गई, अब कोई सूरत नहीं बची है, तभी अचानक कोई ऐसी राह निकल आती है जिसके बारे में दूर-दूर तक नहीं सोचा होता है। यह किसी धर्म का नहीं, प्रकृति का नियम है।और भीऔर भी
जब कभी लगता है कि अब तो हद हो गई, अति हो गई, अब कोई सूरत नहीं बची है, तभी अचानक कोई ऐसी राह निकल आती है जिसके बारे में दूर-दूर तक नहीं सोचा होता है। यह किसी धर्म का नहीं, प्रकृति का नियम है।और भीऔर भी
© 2010-2025 Arthkaam ... {Disclaimer} ... क्योंकि जानकारी ही पैसा है! ... Spreading Financial Freedom