सहयोग को भाव
देवी-देवताओं का काम भी दो हाथों से नहीं चलता तो इंसान की क्या बिसात! मगर हम अपने गुमान में इतने मशरूफ रहते हैं कि अपनों तक का सहयोग देख नहीं पाते। हकीकत यह है कि जब तक हम सहयोग को भाव नहीं देते, तब तक बड़े नहीं बन सकते।और भीऔर भी
देवी-देवताओं का काम भी दो हाथों से नहीं चलता तो इंसान की क्या बिसात! मगर हम अपने गुमान में इतने मशरूफ रहते हैं कि अपनों तक का सहयोग देख नहीं पाते। हकीकत यह है कि जब तक हम सहयोग को भाव नहीं देते, तब तक बड़े नहीं बन सकते।और भीऔर भी
कितनी विचित्र बात है कि जिस उल्लू को हम भारतीय लोग देवी लक्ष्मी की सवारी मानते हैं, उसी की जान को हमारे ही कुछ भाई-बंधुओ के चलते खतरा पैदा हो गया है। इस पवित्र पक्षी को भी हम अंधविश्वास और स्वार्थ के चलते मारने से नहीं हिचकते। उल्लू के अंगों के दवा के तौर पर गलत उपयोग और तंत्र-मंत्र के लिए किए जा रहे अनियंत्रित अवैध व्यापार के कारण भारत में यह जीव गंभीर खतरे में है।औरऔर भी
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