खाद्य मुद्रास्फीति की दर में हल्की-सी कमी जरूर आई है। लेकिन यह अब भी दहाई अंक में बनी हुई है। वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की तरफ से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार खाद्य मुद्रास्फीति की दर 29 अक्टूबर को समाप्त हुए सप्ताह में 11.81 फीसदी रही है। इससे ठीक पिछले हफ्ते में इसकी दर 12.21 फीसदी दर्ज की गई थी। दाल, सब्जियों, दूध व मांस, मछली की कीमतों का बढ़ना जारी रहा। अक्टूबर के चार हफ्चोंऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति के ऊंचे स्तर को धंधे के नए अवसर में तब्दील किया जा सकता है। यह कहना है दुनिया की जानीमानी सलाहकार फर्म केपीएमजी की ताजा रिपोर्ट का। राजधानी दिल्ली में मंगलवार को आयोजित नौवें ज्ञान शताब्दी सम्मेलन (नॉलेज मिलेमियम समिट) में पेश इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे कुछ कंपनियों ने खाद्य वस्तुओं को प्रभावित करनेवाली मांग-आपूर्ति की चुनौती को नवोन्मेष के जरिए बिजनेस का मौका बना लिया है। इनके बिजनेस म़ॉडल सेऔरऔर भी

एक हाथ जब दूसरे हाथ की ही फजीहत करने लग जाए तो इसे आप क्या कहेंगे? लेकिन अपनी सरकार का यही हाल है। एक तरफ रिजर्व बैंक महंगाई रोकने के लिए अपनी तरफ से हरसंभव उपाय किए जा रहा है, दूसरी तरफ वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु कह रहे हैं कि रिजर्व बैंक ने महंगाई रोकने के लिए परंपरागत किताबी उपायों को ही आजमाया है। इसलिए ये उपाय काम नहीं आए। मजे की बातऔरऔर भी

मुद्रास्फीति के सामने जैसी फजीहत सरकार की हो रही है, वैसी तो विपक्ष के सामने भी नहीं हो पाती। सरकार व रिजर्व बैंक की मशक्कत और अच्छे मानसून के बावजूद खाद्य मुद्रास्फीति की दर 22 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में 12.21 फीसदी पर पहुंच गई। दिवाली 26 अक्टूबर को थी। लेकिन हमारे वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की ढिठाई तो देखिए जो कह रहे हैं कि कीमतों में यह तेजी त्यौहारी सीजन के चलते आई है क्योंकि इसऔरऔर भी

अमेरिकी बाजार का सूचकांक डाउ जोंस 1.53 फीसदी ऊपर। लेकिन यूरोप के संकट ने एशियाई बाजारों को दबा डाला। भारत भी दबाव में। ऊपर से खाद्य मुद्रास्फीति नौ महीनों के शिखर 12.21 फीसदी पर। इसने निफ्टी पर चोट जरूर की। लेकिन तेजडियों के उत्साह पर आंच नहीं आई और वे निफ्टी को 5500 के ऊपर ले जाने में लगे हुए हैं। यू तो मंदड़ियों का मनोविज्ञान बेचते ही बेचते चले जाने का है। लेकिन अगर समर्थन स्तरऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति के दहाई अंक में पहुंचने के बीच वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने माना है कि इसकी मुख्य वजह मांग का बढना नहीं है, बल्कि सप्लाई की कमी है। उन्होंने कहा कि खाद्य मुद्रास्फीति में लगातार तेजी की मुख्य वजह खाद्य आपूर्ति की बाधाएं हैं और हमें देखना होगा कि हम इन्हें कैसे दूर सकते हैं। राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को विजया बैंक के 81वें स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन करने के बाद दौरान मुखर्जी नेऔरऔर भी

मुद्रास्फीति सरकार और रिजर्व बैंक को मुंह चिढ़ाने से बाज नहीं आ रही है। लेकिन सत्ता शीर्ष पर बैठे सलाहकार यही कहे जा रहे हैं कि रिजर्व बैंक ने अब तक जो किया है, उसे जारी रखा जाना चाहिए। अवाम को चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि मार्च 2012 तक मुद्रास्फीति घटकर 7 फीसदी तक आएगी। अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन और रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन ने यहीऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति में एक अक्टूबर को समाप्त सप्ताह के दौरान मामूली गिरावट दर्ज की गई है। लेकिन प्रमुख खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी के कारण यह अब भी 9.32 फीसदी के ऊंचे स्तर पर है। थोक मूल्यों पर निकाली जानेवाली इस खाद्य मुद्रास्फीति की दर 24 सितंबर को खत्म सप्ताह में 9.41 फीसदी पर थी। वैसे, हमारे नियामक इस बात पर संतोष जताते हैं कि पिछले साल के समान सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति 17.14 फीसदी थी।औरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति का बढ़ना और हमारे वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का चिंतित होना लगता है जैसे अब अनुष्ठान बन गया है। 24 सितंबर को खत्म हफ्ते में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 9.41 फीसदी पर पहुंच गई। इसके जारी होने के बाद वित्त मंत्री ने कहा कि यह निश्चित तौर पर चिंता का कारण है। वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक फल, सब्जी, दूध व अंडा, मांस-मछली की कीमत में तेजी के चलते 24औरऔर भी

दुनिया के बाजारों के बढ़ने कारण अपना शेयर बाजार भी भारी अंतर के साथ खुला। निफ्टी 2.79 फीसदी बढ़कर 4883.65 पर तो सेंसेक्स 2.72 फीसदी बढ़कर 16,222.49 पर। शाम होते-होते निफ्टी 136.75 अंकों की बढ़त के साथ 4888.05 और सेंसेक्स 440.13 अंकों की बढ़त के साथ 16,232.54 पर बंद हुआ। इस बीच खाद्य मुद्रास्फीति के ताजा आंकड़ों से जाहिर हुआ कि इस पर कोई लगाम नहीं लग पा रही है तो दोपहर बाद थोड़ी मुनाफावसूली देखी गई।औरऔर भी