ऋण से धन तक
इंसान और उसके रिश्तों को चलानेवाली मूल वृत्तियां हैं – काम, क्रोध, मद, लोभ, भय। समाज को सही करना है तो इन्हीं वृत्तियों को काम में लगाना होगा। सामाजिक विविधता के तंत्र में ये सभी नकारात्मक वृत्तियां एक-दूसरे को काट देंगी। जहर दवा बन जाएगा। और भीऔर भी
तुझसे क्या डरना!
भगवान या तो अदृश्य बैक्टीरिया है या वायरस या किसी किस्म की चुम्बकीय शक्ति। तीनों ही स्थितियों में उससे डरने की नहीं, निपटने की जरूरत है। लेकिन अंध आस्था में हम देख नहीं पाते कि भगवान से डराकर दूसरा अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहा है।और भीऔर भी
सेंधमार और सरकार
चोर और सेंधमार डरते हैं इस बात से कि घरवाले जाग न जाए। इसी तरह सरकार व सत्ताधारी दल इस बात से डरते हैं कि जनता जाग न जाए, उसे सच्ची बात पता न चल जाए। इसलिए उनका तंत्र हमेशा असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की जुगत में लगा रहता है।और भीऔर भी
ज्ञान का हर क़तरा
इतना सारा जानकर करेंगे क्या? अगले जन्म में तो फिर सिफर से शुरू करना है! मृत्यु के इस भाव और भय से जिएंगे तो सारा ज्ञान निरर्थक लगेगा। लेकिन जीवन के हर पल को डूबकर जीना है तो ज्ञान का हर क़तरा जीने को सघन बना देगा।और भीऔर भी
निर्मोही, निरपेक्ष, निडर
हम अक्सर अतीत के प्रति मोह, वर्तमान के प्रति खीझ और भविष्य के प्रति डर से भरे रहते हैं। कल, आज और कल को साधना जरूरी है। लेकिन उसके लिए हमें निर्मोही, निरपेक्ष और निडर बनना होगा।और भीऔर भी
सेल में शॉर्ट के साथ कट रहा कंटक
बाजार के पहले आधे घंटे में आया उछाल दमदार नहीं दिखा। बल्कि, लगता है कि यह मंदड़ियों को 5110 पर स्टॉप लॉस का डर दिखाने की कसरत थी। फिर बाजार ने शुरुआती बढ़त छोड़ दी और 5096.55 तक पहुंचने के बाद गिरने लगा। मंदड़ियों ने 5040 के लक्ष्य के साथ 5090 पर फिर से शॉर्ट सौदे करने शुरू कर दिए। दोपहर दो बजे के आसपास बाजार ने फिर पेंग भरी और निफ्टी 5099.25 तक पहुंच गया। लेकिनऔरऔर भी
खास आपके लिए
काम पर जाना अच्छा नहीं लगता तो समझ लीजिए कि आप अपने अंदर की धारा नहीं, बल्कि समाज के दबाव में काम कर रहे हैं। ऐसे में खास आपके लिए निर्मित शक्तियां भी आपकी मदद नहीं कर पातीं।और भीऔर भी
डरो जिंदगी से
मौत से क्या डरना! वह तो किसी पल आएगी और हाथ पकड़कर साथ ले जाएगी। डरना तो जिंदगी से चाहिए जिसे पल-पल जीना पड़ता है, संभालना पड़ता है। जहां जरा-सी चूक पूरी जिंदगी को नरक बना सकती है।और भीऔर भी
ट्रेडिंग की हड़बड़ी तो होएगी गड़बड़ी
बाजार पूरे लहरिया अंदाज में चला। सेंसेक्स हल्का-सा गिरा। निफ्टी हल्का-सा बढ़ा। यह फर्क है सेंसेक्स के 30 और निफ्टी के 50 का। इसलिए आवाजें उठ रही हैं कि कम से कम सेंसेक्स का आधार बढ़ा दिया जाए क्योंकि वो बाजार का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता। सेंसेक्स में कम से कम 100 कंपनियां तो होनी चाहिए। खैर, फिलहाल बाजार में शोर है कि निफ्टी 4800 की तरफ जा रहा है। जब तक बिकवाली की लहर उतरती नहीं,औरऔर भी


