इतना निवेश कर चुकने के बाद विदेशी निवेशक इस महीने धीरे-धीरे सुस्ती ओढ़ते जा रहे हैं। इससे बाज़ार में नकदी या लिक्विडटी के कम होते जाने का रिस्क बढ़ता जा रहा है। कैश और डेरिवेटिव सेगमेंट में घटते वोल्यूम में यह दिखने भी लगा है। वैसे, हर साल दिसंबर में ऐसा होता रहता है। इससे बड़े ट्रेडरों को ऑर्डर पूरा करने में काफी दिक्कत होती है। लेकिन छोटों पर खास फर्क नहीं पड़ता। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

भारतीय शेयर बाज़ार में विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बाहर से लाकर सस्ता धन डालते जा रहे हैं। इस साल जनवरी से कल तक उन्होंने हमारे बाज़ार के कैश सेगमेंट में 1,46,377 करोड़ रुपए डाले हैं। वहीं, नवंबर तक के 11 महीनों में म्यूचुअल फंडों ने 28,000 करोड़ रुपए निकाले थे। दिसंबर में कल तक उसके साथ देशी संस्थाओं ने 23,015 करोड़ रुपए और निकाले हैं। जाहिर है सारा गुब्बारा एफआईआई ने फुलाया है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

हर कोई यही बोल रहा है कि शेयर बाज़ार में तेज़ गिरावट आ सकती है। लेकिन जानकारों के मुताबिक, इस महीने ऐसा होने की आशंका बहुत कम है। दरअसल, दिसंबर में म्यूचुअल फंड से लेकर विदेशी निवेशक तक मुनाफा समेटने में व्यस्त रहते हैं। एफआईआई की दिलचस्पी धीरे-धीरे बाज़ार की ट्रेडिंग या निवेश में घटती रही है। उनकी नज़र क्रिसमस की छुट्टियों पर है। वे नए साल में जनवरी से ही सक्रियता बढ़ाएंगे। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

साल खत्म होने में अब ढाई हफ्ते ही बचे हैं। इसी दौरान देशी म्यूचुअल फंडों से लेकर विदेशी निवेशक संस्थाओं (एफआईआई) तक को अपना हिसाब-किताब सेटल करना होता है। इस संस्थागत निवेशकों का यह रूटीन काम है। लेकिन इसका शेयर बाज़ार पर अहम प्रभाव पड़ता है। दिसंबर म्यूचुअल फंडों के लिए तीसरी तिमाही का अंत है तो वे एनएवी बढ़ाने में जुटे रहेंगे। वहीं, एफआईआई कैलेंडर वर्ष के हिसाब से ही चलते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

टेक्निकल एनालिसिस में माना जाता है कि शेय़रों में 52 हफ्ते का शिखर प्रतिरोध/रजिस्टेंस का काम करता है और वहां से उसके भाव गिर सकते हैं। लेकिन फिलहाल यह नियम काम नहीं कर रहा। भारत ही नहीं, सारी दुनिया का यही सूरते-हाल है। बहस छिड़ी है कि बाज़ार शक्तियों को अर्थव्यवस्था के कोविड-19 से उबर आने का इतना भरोसा क्यों है? कहीं पलटकर कोरोना ने फिर से कहर बरपाना शुरू कर दिया तो! अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में खरीदार ही खरीदार होने से बुलबुला बनता जा रहा है। बाज़ार से शॉर्ट-सेलर गायब हैं। ऐसे में जब भी बुलबुला फटेगा तो कोई नीचे खरीदकर संभालनेवाला नहीं होगा। नतीज़तन, बाज़ार कभी भी गहरा गोता लगा सकता है। तब, इस मौके का फायदा उठाने के लिए किनारे बैठे शॉर्ट-सेलर बाज़ार में कूदकर अफरातफरी को भुनाने लग जाएंगे और पलक झपकते ही ट्रेडरों और निवेशकों के लाखों करोड़ स्वाहा हो सकते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में वाजिब संतुलन के लिए तेज़ी और मंदी दोनों से कमानेवाले ट्रेडर चाहिए। लेकिन इधर पिछले कई महीनों से मामला एकतरफा हो गया है। बाज़ार से शॉर्ट-सेलर गायब हो गए हैं। उन्होंने जब भी सोचा या किया कि अभी बेचकर बाद में सस्ते में खरीदकर डिलीवरी दे देंगे तो तेजड़ियों के हाथों मुंह की खानी पड़ी और शॉर्ट कवरिंग में भारी घाटा उठाना पड़ा। बाज़ार में खरीदार ही खरीदार छाए हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग तुरत-फुरत का खेल है। ज्यादातर ट्रेडर इंट्रा-डे सौदे निपटाते हैं। संस्थाएं इंट्रा-डे ट्रेडिंग में हैं नहीं तो समूचा मैदान व्यक्तिगत ट्रेडरों के लिए खुला है। स्विंग, मोमेंटम या पोजिशनल ट्रेडिंग की मीयाद भी कुछ दिन से लेकर अधिक से अधिक एकाध महीने होती है। ट्रेडर अपनी पूंजी इससे ज्यादा नहीं फंसाता। इसलिए न्यूनतम रिस्क में अधिकतम कमाई की सोचवाले ट्रेडर हमेशा बढ़ते शेयरों पर दांव लगाकर कमाते रहे हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

निफ्टी व सेंसेक्स ही नहीं, उनमें शामिल आधी से ज्यादा कंपनियां या तो ऐतिहासिक शिखर पर हैं या उससे 5-10% फासले पर। अन्य सूचकांकों में शामिल कंपनियों का भी यही हाल है। केवल सरकारी कंपनियां ही इसका अपवाद हैं। लेकिन उनको लेकर सेंटीमेंट अक्सर इतना डूबा रहता है कि लगता है कि उनमें हाथ लगाया तो ट्रेडिंग का दांव मजबूरन लंबे निवेश में बदलना पड़ेगा। ऐसे में ट्रेड करें तो किन स्टॉक्स में? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

विदेशी संस्थाओं से देशी संस्थाएं निपट लेती हैं। हाई नेटवर्थ या एचएनआई निवेशकों के पास अनुभव से निकली महारत है। प्रोफेशनल ट्रेडर बाज़ार के दांवपेंच के उस्ताद हैं। आखिर, रिटेल ट्रेडरों के लिए क्या रास्ता है? क्या उन्हें बड़ी कपनियां छोड़कर छोटी कंपनियों में ट्रेडिंग के मौके ढूंढने चाहिए? नहीं, क्योंकि बैलगाड़ी से रेल का मुकाबला नहीं किया जा सकता। उन कंपनियों में कभी ट्रेड न करे, जिनका नाम आपने नहीं सुना हो। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी