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झूठ नहीं, अर्ध-सत्य भी नहीं, केवल अर्थसत्य!

बड़ा अजीब है अमृतकाल का यह दौर। जो भी ज्यादा मुखर हैं और जिनकी आवाज़ सुनी या सुनवाई जा रही है, वे सब के सब झूठ बोल रहे हैं। सत्ता का अमृत चखने के चक्कर में कोई अर्ध-सत्य तक नहीं बोल रहा। ऐसे में अर्थव्यवस्था का पूरा सच जानना ज़रूरी है। ‘ट्रेडिंग बुद्ध’ कॉलम में हम 13 जुलाई से अर्थव्यवस्था का सच उजागर करेंगे। 7 सितंबर से यह कॉलम मूल रूप में लौट आएगा।

इस दौरान ‘तथास्तु’ का साप्ताहिक कॉलम बदस्तूर जारी रहेगा।

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consumer

bechna

केवल बेचना, करना नहीं

2026-03-17
By: अनिल रघुराज
On: March 17, 2026
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

upbhokta ya utpadak

उपभोक्ता या उत्पादक

2026-03-12
By: अनिल रघुराज
On: March 12, 2026
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

unjust system

यह सिस्टम है या सितम!

2025-10-19
By: अनिल रघुराज
On: October 19, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

 और भीऔर भी

dekhne ka thrill

देखने का थ्रिल

2024-12-22
By: अनिल रघुराज
On: December 22, 2024
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

bhokta se drashta

भोक्ता से दृष्टा

2024-10-03
By: अनिल रघुराज
On: October 3, 2024
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

understanding fear

डरता है साहसी भी

2023-12-31
By: अनिल रघुराज
On: December 31, 2023
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

self doubt and confidence

आत्मविश्वास के साथ आत्मसंदेह

2023-12-30
By: अनिल रघुराज
On: December 30, 2023
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

algorhytm consumers

नागरिक से ज्यादा उपभोक्ता

2023-12-29
By: अनिल रघुराज
On: December 29, 2023
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

dharm adharm

धर्म का अधर्म

2022-10-28
By: अनिल रघुराज
On: October 28, 2022
In: ऋद्धि-सिद्धि

 और भीऔर भी

peace

अंदर से बाहर, सबसे बाहर

2022-01-03
By: अनिल रघुराज
On: January 3, 2022
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

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निवेश – तथास्तु

  • जहां जितना दम, वहां आए उतना निवेश
    12 Jul 2026

    शेयर बाज़ार में धन का प्रवाह बढ़ता है तो सूचकांक से लेकर अलग-अलग स्टॉक्स तक बढ़ने लगते हैं। धन का प्रवाह सूखते ही सारी तेज़ी हवा हो जाती है। सितंबर 2024 के बाद विदेशी पोर्टफलियो निवेशकों (एफपीआई) के निकलने जाने से हमारे शेयर बाज़ार की यही दशा-दिशा चल रही है। एफपीआई झूमकर लौटे नहीं तो अपना शेयर बाज़ार एक कदम आगे, दो कदम पीछे चलता रहेगा। ऐसा नहीं कि विदेशी निवेशक भारत से चिढ़कर भाग रहे हैं। […]

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क्या आप जानते हैं?

  • हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

    इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर जितने भी 69,963 किस्म के रीढ़वाले या कशेरुकी (vertebrates) जीव-जन्तु हैं, उन्होंने देखने की क्षमता वाली अपनी आंखें एक बैक्टीरिया के जीन से हासिल की है। यह सच अप्रैल 2023 में पीएनएएस (प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज) की …

अपनों से अपनी बात

  • साल में 41-112%, मिले है सिर्फ यहां!

    भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और आगे भी बढ़ेगी। लेकिन कहा जा रहा है कि इसका लाभ आम आदमी को पूरा नहीं मिलता। अमीर-गरीब की खाईं बढ़ रही है। बाज़ार को आंख मूंदकर गालियां दी जा रही हैं। लेकिन बाज़ार सचेत लोगों के लिए आय और दौलत के सृजन ही नहीं, वितरण का काम भी करता है। हमने तथास्तु सेवा इसीलिए शुरू की है ताकि अर्थव्यवस्था, खासकर कंपनियों के बढ़ने का लाभ निपट गरीबी से ऊपर रहनेवाले लोगों तक पहुंचाया जा सके। वे जिन्हें बैंक बहुत हुआ तो 9 प्रतिशत देता है, जबकि वास्तविक महंगाई की दर 10 प्रतिशत से ऊपर रहती है। वे भागकर जाते हैं सोने और रीयल एस्टेट में चले जाते हैं तो उनकी बचत लॉक हो जाती है। देश के काम नहीं आती। खुद उनके कितने काम आएगी, यह भी पक्का नहीं। जो पिछले साढ़े चार सालों से अर्थकाम से जुड़े हैं, वे हमारी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से भलीभांति वाकिफ हैं। शुरू में हम भी कच्चे थे तो बाज़ार के उस्तादों के जाल में फंस गए। गलतियां कीं। लेकिन जैसे ही समझ में आया, खटाक से उनसे किनारा कस लिया। करीब सवा साल पहले से नए सिरे से शुरू किया तो मजबूत आधार और गहन रिसर्च के साथ। उसी का नतीजा है कि हमारी सलाहें शानदार-जानदार रिटर्न दे रही हैं। पिछली बार हमने अगस्त 2013 से अगस्त 2014 तक का लेखाजोखा रखा था। अब सितंबर 2013 से सितंबर 2014 की बानगी पेश है। सितंबर 2013 में पांच रविवार थे तो पांच कंपनियां। आप नीचे की सारिणी से देख सकते हैं कि पांच में चार ने अपना (तीन से पांच साल का) लक्ष्य साल भर में ही पूरा कर लिया है, जबकि एक कंपनी 84.57 प्रतिशत रिटर्न के साथ लक्ष्य से ज़रा-सा पीछे है। तारीख कंपनी तब का भाव समय लक्ष्य 30/09/14 का भाव रिटर्न (%) 01/09/13 डॉ. रेड्डीज़ लैब 2292.90 3 साल 2815 3229.60 40.85 08/09/13 एचडीएफसी बैंक 616.20 3 साल 850 872.65 41.62 15/09/13 अतुल ऑटो 173.65 5 साल 260 367.90 111.86 22/09/13 कमिन्स इंडिया 409.25 3 साल 474 671.05 63.97 29/09/13 नवनीत एजुकेशन 53.15 3 साल 110 98.10 84.57   यहां यह भी गौर करने की बात है कि हम आमतौर पर हर महीने लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉल कैप का संतुलन बनाकर चलते हैं। यह भी बताते हैं कि कहां पर एंट्री करें और आपके पास कुल एक लाख रुपए हों तो उस हफ्ते की कंपनी में कितना लगाना चाहिए, उसके कितने शेयर खरीदने चाहिए। मसलन, सितंबर 2013 में हमने तीन लार्जकैप, एक मिडकैप और एक स्मॉल कैप कंपनी आपके निवेश के लिए पेश की थी। इसमें से लार्ज कैप कंपनियों में डॉ. रेड्डीज़ लैब का शेयर लक्ष्य हासिल कर चुका है और यही नहीं, 24 सितंबर 2014 को 3356.60 रुपए पर 52 हफ्ते का शिखर पकड़ चुका है। एचडीएफसी बैंक भी लक्ष्य हासिल करने के साथ ही 30 सितंबर 2014 को 879.80 रुपए का शिखर हासिल कर चुका है। कमिन्स इंडिया भी लक्ष्य हासिल कर लेने के साथ 4 सितंबर 2014 को 720 रुपए पर 52 हफ्ते का शीर्ष छू चुका है। स्मॉल कैप की श्रेणी वाला स्टॉक अतुल ऑटो साल भर में 111.86 प्रतिशत का रिटर्न देकर लक्ष्य के काफी आगे निकल चुका है। यही नहीं, 12 सितंबर 2014 को वो 446.90 रुपए का शिखर भी चूम चुका है। बाकी बची मिडकैप कंपनी नवनीत एजुकेशन में तीन साल का लक्ष्य 110 रुपए था। उसका शेयर 10 सितंबर 2014 को 104.90 रुपए तक जाने के बाद 30 सितंबर को 2014 को 98.10 रुपए पर था, जो साल का 84.97 रिटर्न दिखाता है। आप ऊपर की सारिणी से देख सकते हैं कि 1 सितंबर 2013 से 30 सितंबर 2014 तक की अवधि में तथास्तु में बताई पांच कंपनियों ने न्यूनतम 40.85 प्रतिशत और अधिकतम 111.86 प्रतिशत रिटर्न दिया है। इसी दौरान एनएसई निफ्टी ने 5550.75 से 7964.80 तक जाकर 43.49 प्रतिशत और बीएसई सेंसेक्स ने 18,886.13 से 26,567.99 तक पहुंचकर 40.67 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। दोस्तों! पुरानी बात फिर दोहरा रहा हूं कि मात्र 200 रुपए में अगर कोई सवा आपको बाज़ार से ज्यादा रिटर्न दिला रही है, वो भी आपको आपकी भाषा में अच्छी तरह कंपनी की जानकारी देकर तो क्या इस सेवा को आपका और आपको इस सेवा का लाभ नहीं मिलना चाहिए। बढ़ रही अर्थव्यवस्था का लाभ उठाइए। यकीन मानिए कि मोदी की सरकार बस एक निमित्त मात्र है। वो रहे या कोई और आए, अगले दस साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जबरदस्त प्रगति के साल होने जा रहे हैं। इस दौरान एक साल में दोगुना ही नहीं, दस साल में अपनी बचत से दस गुना दौलत बनाने के मौके बहुत सारे आएंगे। दूसरे आपको बस उल्लू बनाएंगे। केवल हम ही हैं जो पूरी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से आपके लिए निवेश के हर रविवार को शानदार मौके लेकर आते रहेंगे। तुलसीदास की चौपाई याद कीजिए – सकल पदारथ है जन मांही, कर्महीन नर पावत नाहीं। आपके हिस्से का कुछ कर्म हम कर दे रहे हैं। बाकी तो आपको ही करना पड़ेगा। इसलिए…. सोचिए। समझिए। फैसला कीजिए। तथास्तु!!!

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ट्रेडिंग – बुद्ध

  • अर्थव्यवस्था से बेगाना नहीं शेयर बाजार
    13 Jul 2026

    साल भर से ज्यादा हो गए। शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग के हुनर, सीख व अभ्यास के जुड़े इस कॉलम में सबके लिए खुला लगभग 200 शब्दों का पहला पैराग्राम हमेशा अर्थव्यवस्था पर केंद्रित रहता है। कभी सरकार की नीतियां, कभी रिजर्व बैंक के फैसले तो कभी किसानी, बेरोज़गारी व गरीबी की स्थिति। अर्थव्यवस्था के पूरे स्पेक्ट्रम को पकड़ने की कोशिश रहती है। सब्सक्राइबरों के साथ ही अन्य लोगों ने भी सवाल उठाए हैं कि शेयर बाज़ार की स्वतंत्र गति है। उससे जुड़े कॉलम को अर्थव्यवस्था की टोपी पहना देने का क्या तुक है? दोस्तों, अर्थव्यवस्था और शेयर बाज़ार को संजीदगी से देखते, समझते और इनके बारे में लिखते हुए मुझे तीस साल हो चुके हैं। यह सिलसिला अमर उजाला कारोबार के लॉन्च के साथ 1996 में शुरू हुआ था। फिर भी मैं खुद को अर्थव्यवस्था व शेयर बाज़ार का विशेषज्ञ नहीं, बल्कि एक नौसिखिया छात्र ही मानता हूं। कुछ सफल विशेषज्ञों ने झाड़ पिलाई कि जब शेयर बाज़ार पर लिखते हो तो सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचन मत किया करो। सफल होना चाहते हो तो क्या लिखना है, इससे ज्यादा ज़रूरी है यह तय करना कि क्या नहीं लिखना है। सब बचकर चलते हैं तो तुम भी बचकर चलो। फटे में क्यों टांग अड़ाते हो! लेकिन सत्य के आग्रह को पिघलाकर यूं टेढ़ा करना कतई आसान नहीं। झूठ नहीं, अर्धसत्य भी नहीं, केवल अर्थसत्य।

जानिए

  • ज़ीरो-सम गेम नहीं है यह
  • ईटीएफ: चलो बाजार खरीद लें
  • मायने आईपीओ ग्रेडिंग के
  • जवाब कमोडिटी बाजार के

बूझिए

  • ओपन ऑफर, बायबैक, डीलिस्टिंग
  • इश्यू मूल्य और बुक बिल्डिंग
  • गुत्थी ऋण बाजार की
  • यह कासा बला क्या है?

आज़माइए

  • मोटामोटी दस बातें शेयरों की
  • गोल्ड ईटीएफ एक, दाम अनेक
  • न करें कम एनएवी का लालच
  • फायदे म्यूचुअल फंड निवेश के

क्या आप जानते हैं?

हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर

और भी

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