ऑलकार्गो ग्लोबल लॉजिस्टिक्स (बीएसई कोड-532749) का शेयर बहुत सस्ता तो नहीं कहा जा सकता क्योंकि इसकी बुक वैल्यू 70.74 रुपए है जबकि शेयर का भाव इस समय बीएसई में 170 रुपए तो एनएसई में 170.45 रुपए चल रहा है। यानी बुक वैल्यू से करीब 2.40 गुना। लेकिन पी/ई अनुपात के लिहाज से देखें तो यह अपनी समकक्ष कंपनियों – ब्लू डार्ट और गति से अपेक्षाकृत सस्ता है। इसका पी/ई अनुपात 21.23 है तो ब्लू डार्ट का 30.41औरऔर भी

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स जून 1990 में 850 अंक पर था। जून 2000 में यह 4850 अंक पर पहुंचा और अब जून 2010 में 17,700 अंक पर। इस तरह 20 साल में इसने मूलधन को 20 गुना बढ़ा दिया है। सालाना चक्रवृद्धि दर से देखें तो इसने 1990-2000 के दौरान 18.8 फीसदी और 2000-2010 के बीच 14.1 फीसदी सालाना रिटर्न दिया है। पूरे दो दशकों का औसत सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न 16.4 फीसदी का है।औरऔर भी

निटको कंपनी या ब्रांड के नाम से शायद आप परिचित होंगे। 1953 में बनी कंपनी है और टाइल्स व मार्बल का धंधा करती है। टाइल्स वह मुंबई के बाहर अलीबाग में बनाती है और इटली, स्पेन, चेकोस्लवाकिया व चीन जैसे देशों से आयातित मार्बल की प्रोसेंगिग मुंबई के भीतर कांजुर मार्ग में करती है। कंपनी ने 2009-10 में कुल मिलाकर 8.71 करोड़ रुपए का घाटा उठाया था। लेकिन मार्च 2010 की तिमाही में वह 2.50 करोड़ रुपएऔरऔर भी

अलेम्बिक (बीएसई कोड – 506235), इलेक्ट्रोस्टील कास्टिंग्स (बीएसई कोड – 500128) और विविमेड लैब्स (बीएसई कोड – 532660)। ये तीन कंपनियां बीएसई के बी ग्रुप में शामिल हैं और एनएसई में भी लिस्टेड हैं। एंजेल ब्रोकिंग के डायरेक्टर-रिसर्च ललित ठक्कर का मानना है कि ये तीनों स्टॉक काफी संभावना रखते हैं। इनमें कोई न कोई ट्रिगर है और साल भर में ये 40 से 50 फीसदी का रिटर्न दे सकते हैं। यानी, आज आपने इनमें 1000 रुपएऔरऔर भी

आज के स्टार परफॉर्मर रहे आईएफसीआई व टीटीएमएल (टाटा टेली महाराष्ट्र लिमिटेड) और इन दोनों के बारे में हम काफी समय से लिख रहे हैं। बैंकिंग शेयरों ने भी अच्छी गति पकड़ी। फ्यूचर सौदों में फिजिकल सेटलमेंट न होने के कुछ शिकार नजर आ रहे हैं। जेएसडब्ल्यू होल्डिंग्स 1750 रुपए तक हिट रहा, हालांकि इसकी कोई जरूरत नहीं थी। इसी तरह एचसीसी 128 रुपए तक मार करता रहा और उसने तमाम स्टॉप लॉस और मार्क टू मार्केटऔरऔर भी

दुनिया के जानेमाने अरबपति निवेशक जॉर्ज सोरोस भारत के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज बीएसई में इक्विटी हिस्सेदारी खरीदने की कोशिश में लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्र फाइनेंशियल टाइम्स की एक ताजा खबर के मुताबिक सोरोस बीएसई में दुबई होल्डिंग्स की 4 फीसदी इक्विटी खरीदेंगे। इसके लिए वे 4 करोड़ डॉलर देने को तैयार हैं। इस आधार पर बीएसई का मूल्यांकन 100 करोड़ डॉलर का निकलता है। सेबी के नियमों के मुताबिक कोई एक विदेशी निवेशक देश केऔरऔर भी

पहले इसका नाम जिंदल स्टेनलेस स्टील था। 2008 में इसके जेएसएल बनाया गया और फिर मई 2010 में इसे जेएसएल स्टनेलेस लिमिटेड (बीएसई कोड – 532508, एनएसई कोड – जेएसएल) कर दिया गया है। इक्रा ऑनलाइन की एक रिसर्च रिपोर्ट बताती है कि यह देश में स्टेनलेस स्टील बनानेवाली सबसे बड़ी कंपनी है। घरेलू स्टेनलेस स्टील बाजार में उसकी हिस्सेदारी लगभग 40 फीसदी है। उसकी छह भारतीय और 11 विदेशी सब्सिडियरियां हैं। कंपनी के दो रुपए अंकितऔरऔर भी

किसी शेयर की बुक वैल्यू 17.97 रुपए हो और बाजार में उसका भाव पिछले कई महीनों से 12-14 रुपए चल रहा हो तो समझ में नहीं आता। लेकिन नाकोडा लिमिटेड का हाल ऐसा ही है। ऐसा नहीं कि इसके बारे में किसी को जानकारी न हो और यह कोई गुमनाम कंपनी हो। मीडिया से लेकर इंटरनेट के अलग-अलग फोरम पर इसके बारे में बराबर लिखा जा रहा है। कइयों ने इसे मल्टी बैगर (कई गुना रिटर्न देनेवाला)औरऔर भी

कैम्फर एंड एलायड प्रोडक्ट्स का शेयर केवल बीएसई में लिस्टेड है। शुक्रवार को यह 12.18 फीसदी बढ़कर 128.95 रुपए पर बंद हुआ और इसमें कारोबार भी औसत से बहुत ज्यादा हुआ। जहां पिछले दो हफ्तों का औसत 33,000 शेयरों का रहा है, वहीं शुक्रवार को इसमें 2.33 लाख शेयरों का कारोबार हुआ। इसके पीछे की वजह यह है कि कंपनी के बारे में कोई बड़ी खबर आने को है। जानकार बताते हैं कि इस शेयर में अभीऔरऔर भी

सुबह लिखते समय हमें भी इतनी उम्मीद नहीं थी। लेकिन दोपहर के करीब 1 बजे थे और ऋद्धि सिद्धि ग्लूको बिऑल्स का शेयर 20 फीसदी बढ़कर जैसे ही 338.75 रुपए पर पहुंचा, उस पर सर्किट ब्रेकर लग गया और इसमें बाकी दिन के लिए कारोबार रुक गया। लेकिन तब तक उसमें 6.34 लाख शेयरों की ट्रेडिंग हो चुकी थी, जबकि पिछले दो हफ्तों का औसत कारोबार 90,000 शेयरों का ही रहा है। ऐसा क्या हो गया तोऔरऔर भी