शेयर बाजार में ट्रेडिंग का यह कॉलम शुरू हुए करीब चार साल होने जा रहे हैं। इसकी प्रेरणा तब मिली, जब हमने देखा कि हिंदी, मराठी या गुजराती भाषी तमाम लोग टिप्स पर ट्रेडिंग करते हैं। कंपनी को ऑर्डर मिलनेवाले हैं, बड़ा एफआईआई खरीदने जा रहा है, म्यूचुअल फंड की खरीद आनेवाली है या बाज़ार का कोई बड़ा खिलाड़ी हाथ लगानेवाला है। ऐसे सफेद झूठ फैलाकर मासूम ट्रेडरों को ठगा जा रहा था। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

जीवन में हमेशा बहुत कुछ नया होता रहता है। इसी तरह अर्थव्यवस्था में भी बहुत कुछ नया और अच्छा होता रहता है। सरकार कुछ करे या करे, उद्यमी अपनी धुन में कुछ न कुछ नया रचते रहते हैं। समझदार निवेशक को हमेशा ऐसे उभरते उद्यमियों और उनकी कंपनियों पर नज़र रखनी चाहिए ताकि वे अपनी अतिरिक्त बचत को उनके साथ जोड़कर जोखिम से उपलब्धि की यात्रा कर सकें। आज तथास्तु में इसी यात्रा पर निकली एक कंपनी…औरऔर भी

लोगबाग ऑप्शंस के दीवाने हैं, खासकर निफ्टी व बैंक निफ्टी ऑप्शंस के। इक्विटी डेरिवेटिव्स के टॉप-20 कॉन्ट्रैक्ट में आपको यही दो ऑप्शंस छाए मिलेंगे। धन भी ज्यादा नहीं लगता। मसलन, निफ्टी-8950 में कॉल का भाव है 16.75 रुपए और लॉट 75 का तो कुल लगे 1256 + 30 रुपए का ब्रोकरेज। डूबें तो यही 1286 रुपए, और फायदा महीने भर में 50-60%! बस डेल्टा, थीटा, गामा व वेगा सीख लें। फंसान है तगड़ी। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

जिस चीज़ के चाहनेवाले बढ़ जाते हैं तो उसके भाव चढ़ जाते हैं। यह बात शेयर बाज़ार पर भी लागू होती है। हां, यह छोटे या रिटेल निवेशकों की नहीं, बड़ों की खरीद असरकारी होती है। ट्रेडिंग में सफलता की कुंजी है कि इसे कैसे पकड़ा जाए। कुछ लोग इसके लिए शेयरों के फ्यूचर्स के ओपन इंटरेस्ट को आधार बनाते हैं। वे फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस से बाहर के शेयरों को हाथ नहीं लगाते। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

कंपनियों में पांच-दस नहीं, बल्कि साल-दो साल के लिए भी निवेश करनेवालों की संख्या घटती जा रही है क्योंकि अधिकांश लोगों के लिए यह घाटे का सौदा साबित हुआ है। लगाया था सौ रुपए, दस साल में घटकर रह गया आठ रुपया। इसलिए आम निवेशक ट्रेडर बनते गए। उसमें भी कोई सिरा नहीं मिला तो मूल शेयरों के डेरिवेटिव्स, फ्यूचर्स व ऑप्शंस में खेलने लगे और कम से भयंकर जोखिम में धंस गए। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

हर समय, हर जगह लोगबाग न्यूनतम मेहनत में अधिकतम नोट बनाने की फिराक में लगे रहते हैं। वित्तीय बाज़ार के आम ट्रेडर इसमें औरों से चार कदम आगे हैं। शेयर बाज़ार में पेनी स्टॉक्स का झांसा बरकरार है। अब डेरिवेटिव ट्रेडिंग का नया दौर चल निकला है तो सभी उसके पीछे भाग रहे हैं। इसमें भी फ्यूचर्स नहीं, ऑप्शंस के पीछे क्योंकि वो ऊपर-ऊपर काफी सस्ता नज़र आता है। यह कितना सही है? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

समृद्धि बढ़ने से खपत का स्तर बढ़ता है और बिजनेस के नए-नए अवसर बनते जाते हैं। देश की अर्थव्यवस्था बढ़ती जाती है। कुछ उद्यमी इतने तेज़ होते हैं कि वे देश की नहीं, विदेश तक के अवसरों को पकड़ लेते हैं। लेकिन कई उद्योग ऐसे हैं जिन्हें जीवन की तरह उतार-चढ़ाव के चक्र से गुजरना पड़ता है। प्रबंधन दुरुस्त हो तो हर दुष्चक्र तोड़ देता है। तथास्तु में विजय के मुहाने पर खड़ी एक ऐसी ही कंपनी…औरऔर भी

जो समय और टेक्नोलॉज़ी के साथ न चल सके, उसे मिटने से कोई रोक नहीं सकता। ज़ेरॉक्स व कोडक जैसी नामी कंपनियों का यही हश्र हुआ। यही नहीं, इंटरनेट पर सबसे पहले छानेवाली ब्लूचिप कंपनी याहू भी मिटने की कगार पर पहुंची तो वेरिज़ोन ने उसे काफी सस्ते में खरीद लिया। लेकिन आज हम तथास्तु में भारतीय मनोरंजन जगत की ऐसी कंपनी पेश करने जा रहे हैं जो बदलते वक्त के साथ खुद को ढालती रही है…औरऔर भी

समय के साथ हम अपने तौर-तरीकों को अपग्रेड न करें तो पीछे रह जाएंगे। वित्तीय बाजार की ट्रेडिंग में भी विदेशी संस्थाओं व हेज फंडों के आने के साथ सिस्टम में बराबर नयापन आता जा रहा है। अर्थकाम अपना ट्रेडिंग सिस्टम अद्यतन बनाने में लगा है। इस काम में दो हफ्ते लग जाएंगे। इसलिए यह कॉलम अब अगली बार 20 फरवरी को आएगा। वर्तमान सब्सक्राइबरों का सब्सक्रिप्शन दो हफ्ते बढ़ा दिया गया है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अपने यहां शेयरों में निवेश करते वक्त कंपनी के धंधे व अर्थव्यवस्था की स्थिति के साथ ही बड़ा रिस्क यह है कि हमारा वित्तीय बाज़ार ठगों से भरा हुआ है। कहने को सेबी है, लेकिन इनसाइडर ट्रेडिंग खूब होती है। सबको बताने के लिए सूचनाएं अलग और जानकार विश्लेषकों के लिए अलग होती हैं। ऐसे में ज़रूरी है कि निवेश करने से पहले सारी जानकारियों को कायदे से ठोंक-बजा लिया जाए। आज तथास्तु में एक रिस्की कंपनी…औरऔर भी