लंबे निवेश के लिए शेयर चुनना ज्यादा मुश्किल नहीं है। कंपनी के धंधे का इतिहास, बिजनेस मॉडल और भावी संभावनाओं वगैरह को देखकर चुन सकते हैं। इसमें कई अनुपात हमारी मदद कर देते हैं। लेकिन ट्रेडिंग के लिए शेयर चुनना काफी मुश्किल है। लेकिन इसका बड़ा आसान समाधान है कि जब मुश्किल लगे तो ट्रेडिंग ही नहीं करनी चाहिए। डॉक्टर ने तो कहा नहीं है कि हर दिन ट्रेडिंग करना ज़रूरी है। अब परखें सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अपना समाज मूल्य को लेकर बड़ा सतर्क रहा है। तभी इसके लिए अंग्रेज़ी में दो ही शब्द हैं वैल्यू और प्राइस। लेकिन अपने यहां इसके लिए कम से कम चार शब्द हैं दाम, कीमत, मूल्य और भाव। मूल्य का थोड़ा व्यापक और सकारात्मक अर्थ है। उसका इस्तेमाल जीवन मूल्यों के संदर्भ में भी किया जाता है। भाव बाज़ार तय करता है, जबकि कीमत और दाम में हम मोलतोल कर सकते हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

हर बिजनेस की तरह ट्रेडिंग में पूंजी लगती है। कितनी? यह रिस्क लेने की क्षमता पर निर्भर है। डेरिवेटिव सेगमेंट में एक लॉट 5 लाख रुपए का है तो उसके लिए पांच लाख रुपए से कम नहीं। वहीं, कैश सेगमेंट में ट्रेडिंग के लिए न्यूनतम एक लाख रुपए होने चाहिए। नियमतः शेयर बाज़ार के लिए रखे धन का 5% ही ट्रेडिंग में लगाना चाहिए। यानी, 20 लाख रुपए अतिरिक्त हों, तभी ट्रेडिंग करें। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

जिस तरह बिना लागत लगाए कोई बिजनेस नहीं हो सकता, उसी तरह वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में स्टॉप-लॉस या घाटे से नहीं बचा जा सकता। आप कितनी भी अच्छी ट्रेडिंग रणनीति बना लें, महंगी से महंगी सेवा ले लें, उसमें चूक का होना लाजिमी है। इसलिए रणनीति को बराबर मांजते रहना पड़ता है और उस पर अनुशासन में बंधकर अमल करना होता है। यहां मन की नहीं, बुद्धि की सुननी पड़ती है। अब पकड़ें गुरुवार की दशादिशा…औरऔर भी

नया संवत मांग करता है कि हम कुछ मूलभूत सबक दोहरा लें। सबसे पहली बात याद रखें कि वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग एक तरह का बिजनेस है। हर बिजनेस की तरह ही इसमें मेहनत, बुद्धि व समय के साथ आमदनी व लागत का पूरा हिसाब-किताब रखना पड़ता है। जो ट्रेड सही पड़ते हैं, उनसे मिला लाभ इस धंधे की आमदनी है। वहीं, जो सौदे उलटे पड़ते हैं, उनमें लगा स्टॉप-लॉस इसकी लागत है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

भारत देश या उपमहाद्वीप नहीं, दरअसल पूरा द्वीप है। इसमें साल तक बदल जाते हैं। उत्तर में विक्रम नव वर्ष संवत 2073 वित्त वर्ष के एक हफ्ते बाद 8 अप्रैल को शुरू हो चुका है। वहीं, पश्चिम में गुजराती नव वर्ष संवत 2073 दिवाली के एक दिन बाद 31 अक्टूबर से शुरू हुआ है। चूंकि शेयर बाज़ार में गुजरातियों की बहुतायत है, इसलिए आज नए संवत की ट्रेडिंग का पहला दिन है। मंगलवार से कीजिए शुभ शुरुआत…औरऔर भी

रुपया, सोना और जमीन-जायदाद में जो भी लक्ष्मी बसती हैं, वे मूल्य के हिसाब से बदलती रहती हैं। दिवाली से दिवाली तक सोने के दाम 11.61% बढ़े, लेकिन पांच साल में मात्र 0.35% बढ़े हैं। जमीन-जायदाद में मांग न निकलने से मामला ठंडा है। सेंसेक्स साल भर में 8.68% और पांच साल में 60.37% बढ़ा है। लेकिन आज तथास्तु में हम जिस कंपनी की चर्चा करने जा रहे हैं, उसका शेयर पांच साल में 175.27% बढ़ा है…औरऔर भी

हर मुश्किल अपने साथ उसका समाधान भी लेकर आती है। वित्तीय जगत में हर तरफ शिकारी हैं तो आम ट्रेडर व निवेशक के पास आज उससे बचाव और अपनी धार बनाने का सारा सरंजाम भी है। जो सूचनाएं बड़े बैंकों, बीमा कंपनियों, एचएनआई या विदेशी व हेज फंडों के पास हैं, वे आज हमें भी उपलब्ध हैं। उनके तार जोड़कर जानकार बन जाएं तो हम भी सबसे अच्छे ट्रेडिंग आइडिया निकाल सकते हैं। अब दिवाली-पूर्व का अभ्यास…औरऔर भी

हमारे वित्तीय उद्योग के साथ बड़ी समस्या ये है कि यहां अंदर के बहुतेरे लोग निवेशकों की मदद नहीं, शिकार करने की ताक में लगे रहते हैं। ब्रोकर बहुत सारी सलाहें निकालते रहते हैं ताकि हम-आप जमकर सौदे करें और उनका कमीशन बढ़ता रहे। टीवी चैनल और वहां आनेवाले एनालिस्ट अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। बिजनेस अखबारों के लिए भी धंधा पहले है, पाठक बाद में। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

ठीक पिछली उठान पर संस्थाओं की खरीद आ सकती है और पिछली गिरावट पर संस्थाएं बिकवाली कर सकती हैं। लेकिन ध्यान रहे कि वित्तीय बाज़ार में कुछ भी 100% पक्का नहीं। यहां प्रायिकता चलती है। हो सकता है और नहीं भी। इसलिए ट्रेडर को हमेशा रिस्क मैनेज करके चलना पड़ता है। दिक्कत है कि वित्तीय जगत में घाघ भरे पड़े हैं। इसमें ट्रेडिंग की अपनी धार हर किसी को खुद निकालनी पड़ती है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी