ज़नाब बोले: मेरे बाप बड़े बहादुर थे। जंगल में अकेले जाकर शेर से भिड़ गए। पूछा: फिर क्या हुआ तो बोले: शेर उन्हें मारकर खा गया। शेयर बाज़ार में भी ऐसे बहादुर ‘शहीदों’ की कोई कमी नहीं। आए दिन होते रहते हैं। ऐसे लोग स्टॉप-लॉस लगाने को अपनी तौहीन समझते हैं। दरअसल, इस मानसिकता में इंसान खुद को तुर्रमखां समझता है। लेकिन बाज़ार उनकी रत्ती भर भी परवाह किए बगैर चलता जाता है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

कुछ बातें गले में कंठी बांधकर लटका लेनी चाहिए। जैसे, शेयर बाज़ार का निवेश अनिश्चितता से भरा है। इसमें कुछ भी हो सकता है; और क्या-क्या हो सकता है, इसकी सटीक प्रायिकता तक आप नहीं निकाल सकते। यहां सब कुछ जानने का अहंकार जिस दिन भी आपके माथे पर सवार हुआ, समझें उसी दिन से आपके अंत की शुरुआत हो गई। सरलता व विनम्रता निवेश में सफलता की प्रमुख शर्त है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

आप सुनते-सुनते एकदम पक गए होंगे कि वित्तीय बाज़ार, खासकर शेयर बाज़ार बहुत रिस्की है। हालांकि ज़िंदगी भी बहुत रिस्की है क्योंकि हर अगले पल हम अनिश्चितता की भंवर में छलांग लगाते हैं। लेकिन अपना विचार, नज़रिया व तरीका हम सही कर लें तो ज़िंदगी का रिस्क सहज बन जाता हैं। इसी तरह निरंतर शिक्षा से बाज़ार के प्रति हम अपना बर्ताव सही कर लें तो उसका रिस्क पकड़ में आ जाता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

ब्रेकआउट का सीधा-सा मतलब है कि खरीदनेवाले ज्यादा हैं और बेचनेवाले बहुत कम। मांग सप्लाई से ज्यादा। ऐसे में नहीं पता रहता कि बाज़ार या कोई स्टॉक कहां तक ऊपर जाएगा। कोई लक्ष्य नहीं बांध नहीं सकते कि कहां तक पहुंचे तो निकल जाना चाहिए। इसलिए ऐसे ट्रेड में हमेशा ट्रेलिंग स्टॉप लॉस लगाकर चलना चाहिए। अचानक गिरने पर नहीं तो बड़ा घाटा लग सकता है। भाव जितना बढ़े, स्टॉप लॉस उठाते जाएं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

ब्रेकआउट ट्रेड तभी होता है जब शेयर का उच्चतम व न्यूनतम भाव पहले से ऊपर जा रहा हो या कम से कम न्यूनतम भाव बराबर उठ रहा हो। पिछले कुछ दिनों के भावों के ऊपरी-नीचे स्तर को मिलाकर रेखा खींचें तो उठता हुआ त्रिभुज बनता है। अमूमन ऐसी स्थिति में आरएसआई 45-50% के आसपास होता है। लेकिन ब्रेकआउट ट्रेड में बढ़ने-गिरने की प्रायिकता लगभग बराबर होती है तो ये काफी रिस्की होते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

बाज़ार जब बराबर चढ़ रहा हो, अधिकांश शेयर नई ऊंचाइयां छू रहे हों, तब ब्रेकआउट ट्रेड करने का सलीका ही सबसे सही व कारगर रणनीति है। लेकिन ब्रेकआउट ट्रेड के कई तरीके हैं। इनमें से एक है फ्लैग-पैटर्न जिसे हमने कल इस्तेमाल किया। इसके अलावा टेक्निकल एनालिसिस में कुछ अन्य तरीके भी हैं जिन पर हम अगले दिनों  चर्चा करेंगे। मगर, इनमें समान पहलू यह है कि ऐसे ट्रेड बड़े रिस्की होते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के तमाम सूचकांक ऐतिहासिक ऊंचाई पर। हर पांच लिस्टेड कंपनी में से चार के शेयर 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर पर। 20% गिरे हुए शेयरों को हाथ लगाने में भी डर लगता है कि कहीं और न गिर जाएं। अखबार, चैनल व विश्लेषक सभी ‘बुल-रन’ का हल्ला मचाने लगे हैं। रिटेल निवेशक भी अपनी पूंजी लेकर बाज़ार की तरफ दौड़ पड़ा है। लालच के इस दौर में क्या हो ट्रेडिंग रणनीति? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

देश की अर्थव्यवस्था के हाल पर भले ही धुंधलका छाया हो, कंपनियों के नतीजे उतने अच्छे नहीं आ रहे हों, फिर भी शेयर बाज़ार कुलांचे मारता जा रहा है। निफ्टी और सेंसेक्स रोज़ नई ऊंचाई पकड़ रहे हैं। ऐसे में कंपनियों को चुनने में ज्यादा ही सावधानी बरतनी होगी। दूसरे, हमें अपने निवेशयोग्य धन का 25-35% ही शेयरों और बाकी 65-75% एफडी या बांडों में लगाना चाहिए। अब तथास्तु में पेश है आज एक और संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

कभी आपने गौर किया है कि मनीकंट्रोल जैसी वेबसाइटों या बिजनेस चैनलों पर आनेवाले एनालिस्ट ज्यादातर ऐसे शेयर खरीदने को कहते हैं जो पहले ही काफी चढ़ चुके होते हैं। ऊपर से उनमें बढ़ने की जितनी संभावना होती है, उतना ही गहरा स्टॉप-लॉस लगाने को कहते हैं। मसलन, रैम्को सीमेंट्स को 720 पर 790 के लक्ष्य के साथ खरीदो, जबकि स्टॉप-लॉस 650 का है। यानी, 9.72% बढ़त तो उतना ही फटका! इनसे बचें। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

अब तक जो चुका है, उसका इशारा कुछ और होता है, जबकि हो जाता है कुछ और। फिर भी हम भविष्य की योजना बनाना नहीं छोड़ सकते क्योंकि पूरी तरह भाग्य भरोसे रहना इंसान की मूल फितरत नहीं है। जहां जानवर हमेशा परिस्थितियों के माफिक खुद को ढालते हैं और इंसान भी कुछ हद तक ऐसा करता है, वहीं इंसान हालात को बदलता भी है। यही मानव सभ्यता की विकासगाथा का मूल है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी