बाज़ार बड़ा निर्मम और उदार गुरु है। उदार इसलिए क्योंकि वो हर पल कुछ न कुछ नया सिखाता रहता है। इस सीख में अनेक ऐसी अहम बातें होती हैं जिन्हें आप जीवन के दूसरे क्षेत्रों में भी अपना सकते हैं। निर्मम इस मायने में कि आपने सीखा नहीं तो वह आपको बरबाद कर सकता है। नहीं सीखने पर एक दिन आप पाई-पाई को मोहताज हो जाएंगे और वो अपनी रौ में चलता जाएगा। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

पिछले दो हफ्ते में निफ्टी का 2.27% गिरकर 10,000 से नीचे आ जाना लंबे समय के निवेशकों के लिए सुखद है। गुब्बारे का पिचकना अच्छा है। कारण, सूचकांक में शामिल हर पांच में कम से कम दो कंपनियों की वित्तीय सेहत खराब है। कर्ज की फांस उन्हें दबोचे हुए है। ऐसे में चढ़े बाज़ार के भ्रम में नहीं आना चाहिए। निवेश तभी करें, जब उसमें रिटर्न मिलने की पूरी गुंजाइश हो। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

रुपया, अमेरिकी डॉलर या यूरोपीय यूरो। अपने-आप में इन मुद्राओं का कोई मूल्य नहीं। वास्तव में वो महज कागज का टुकड़ा हैं, माया हैं। उनका मूल्य इससे बनता है कि उनमें माल या सेवा खरीदने की कितनी औकात है। इसी तरह कंपनी में निवेश करते वक्त हमें सिर्फ यही नहीं देखना चाहिए कि उसके शेयर का भाव क्या है, बल्कि यह भी कि उसकी औकात या मूल्य क्या है। आज पेश है तथास्तु में एक मूल्यवती कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के साथ आज क्यों न कुछ अपनी और देश की बात कर लें। यह महीना असल में बड़ा खास है। 9 अगस्त को ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ व 15 अगस्त को आज़ादी की 70वीं वर्षगांठ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से बोलेंगे तीसरी बार। अर्थव्यवस्था ठीक, पर अपग्रेड ज़रूरी। हम भी करेंगे तकनीकी व संपादकीय अपग्रेड। इसलिए 6 ट्रेडिंग सत्रों की छुट्टी। अगला कॉलम आएगा सोमवार, 21 अगस्त को। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में जो 5% ट्रेडर कामयाब होते हैं, वे वहां खरीदते हैं जहां से गिरने की प्रायिकता न्यूनतम और बढ़ने की प्रायिकता अधिकतम होती है। इसी तरह वे वहां पर बेचकर निकल जाते हैं जहां बढ़ने की प्रायिकता न्यूनतम और गिरने की प्रायिकता अधिकतम होती है। इन बिंदुओं का फैसला वे पिछले डेटा के मद्देनज़र डिमांड व सप्लाई ज़ोन निकालकर करते हैं। वे गलत साबित होते हैं तो कम घाटा खाते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग के दो अकाट्य सच अमूमन हम स्वीकार नहीं कर पाते। पहला यह कि सारी तैयारियों के बावजूद यहां परिणाम का कोई भरोसा नहीं। यहां सारा खेल अनिश्चितता का है। इसे कोई नहीं बांध सकता। दूसरा सच यह कि यहां उस्तादों के लिए भी घाटे से बचना नामुमकिन है। यहां सफल ट्रेडर वही है जो जानता है कि ठीक से घाटा कैसे खाया जाए, घाटे को न्यूनतम कैसे रखा जाए। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

टमाटर वही, रुपया वही। लेकिन पहले सौ रुपए में दस किलो मिलता था, अब एक किलो। उपयोगिता वही, मूल्य वही। लेकिन भाव चढ़ गया है। मामला सीजनल है। अगले सीजन तक फिर उतर जाएगा। शेयर बाज़ार में बहुत से शेयरों का भी यही हाल है। ऐसे में हमें बहुत सावधानी से वही कंपनियां चुननी चाहिए जिनका मूल्य सीजनल न हो, बराबर चढ़ता रहे और भाव उसी हिसाब से बढ़ता रहे। तथास्तु में आज ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

आगे-पीछे का सारा ध्यान रख अगर हम योजना बनाकर चलेंगे और बाज़ार के रिस्क को समझते हुए स्टॉप लॉस या पोजिशन साइज़िंग के अनुशासन का पालन करेंगे तभी शेयर बाज़ार से नियमित मुनाफा कमा सकते हैं। वहीं, अंधेरे में तीर चलाएंगे तो दो-चार तुक्कों के बाद हमारा लहूलुहान होना तय है। अब तो भावनाएं जोर न मार सके, इसकी व्यवस्था ऑर्डर देते समय ही स्टॉप लॉस व लक्ष्य बांधकर की जा सकती है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

चार्ट पर लगातार हरी-हरी कैंडल बनती जाती है तो हर किसी को लगता है कि खरीदते जाओ क्योंकि शेयर का बढ़ना तो पक्का है। लेकिन हम भूल जाते हैं कि बाज़ार में हर कोई मुनाफा कमाने आया है और शेयर के चढ़ने के बाद बेचेगा नहीं तो सचमुच का मुनाफा कहां से कमाएगा। इसलिए हमें साप्ताहिक या महीने के चार्ट से देखना पड़ता है कि ठीक पिछली बार कहां पर मुनाफावसूली चली थी। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

चार्ट की भाषा फॉर्मूलों में बांधकर नहीं समझी जा सकती। इसीलिए टेक्निकल एनालिसिस के पच्चीसों इंडीकेटर लेकर भी 95% ट्रेडर बाज़ार में पिटते-पिटाते रहते हैं। हमें रूढ़िगत धारणाओं से निकलना होगा। जैसे, माना जाता है कि हरी कैंडल तेज़ी और लाल कैंडल गिरावट का संकेत देती है। लेकिन रंग से ज्यादा कैंडल का आकार और स्थान मायने रखता है। उससे भी ज्यादा अहम है कि ये कैंडल किस ज़ोन में बने हैं। अब लगाएं बुध की बुद्धि…औरऔर भी