ऑप्शंस की चर्चा सोमवार को। उससे पहले हम फ्यूचर्स के कुछ खास-खास पहलू जान लें। कैश सेगमेंट में हम कोई स्टॉक जितने का खरीदते हैं, उतना मूल्य सौदा पूरा होते ही हमारे पास आ जाता है। लेकिन जब हम किसी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट खरीदते हैं, तब उसकी कोई वैल्यू नहीं होती। उसमें वैल्यू या मूल्य तब आता है, तब उसका भाव सौदे के भाव से इधर-उधर होता है। मसलन, हमने कोई फ्यूचर्स सौदा 100 रुपए का खरीदा तोऔरऔर भी

दुनिया में डेरिवेटिव ट्रेडिंग की शुरुआत करीब 400 साल पहले हुई थी। इसके कुछ उदाहरण यूरोप में ट्यूलिप के फॉरवर्ड सौदे और जापान में चावल के फ्यूचर्स हैं। मशहूर कैंडल स्टिक पद्धति का आगाज़ जापान में चावल के फ्यूचर्स की ट्रेडिंग से ही हुई। दुनिया के सबसे पुराना फ्यूचर्स व ऑप्शंस एक्सचेंज – शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड का गठन 1848 में हुआ। वहीं, भारत में पहला फ्यूचर्स बाज़ार साल 1875 में बॉम्बे कॉटन ट्रेड एसोसिएशन के रूपऔरऔर भी

कोरोना वायरस के प्रकोप से देश को बचाने के लिए लॉकडाउन या घरबंदी की मीयाद 19 दिन और बढ़ा दी गई है। इस बीच शेयर बाज़ार छुट्टियों के अलावा बराबर खुला रहा। वह पस्ती से थोड़ा बाहर निकला नज़र आ रहा है। 24 मार्च को घरबंदी लागू होने से सोमवार 13 अप्रैल तक के मात्र बारह ट्रेडिंग सत्रों में निफ्टी-50 सूचकांक 15.29% बढ़ चुका है। लेकिन बाज़ार से अनिश्चितता का साया अभी तक उठा नहीं है तोऔरऔर भी

तीन महीने पहले 11 जनवरी को चीन ने कोरोना वायरस से हुई पहली मौत की घोषणा की थी। उसके बाद सारी दुनिया उलट-पुलट चुकी है। कोरोना की महामारी कोने-कोने तक जा पहुंची है। एशिया ही नहीं, यूरोप से लेकर अमेरिका तक कोहराम मचा हुआ है। विश्व अर्थव्यवस्था मंदी की गिरफ्त में आ गई है। भारत भी इससे अछूता नहीं रह सकता। लेकिन यह घना अंधेरा भविष्य का उजाला भी लाएगा। आज तथास्तु में निवेश लायक 11 कंपनियां…औरऔर भी

मार्च 2020 में सेंसेक्स 23% गिर गया। शेयर बाज़ार से निवेशकों के करीब 15 लाख करोड़ रुपए उड़ गए। विश्व वित्तीय संकट के आगाज़ के दौरान अक्टूबर 2008 में भी सेंसेक्स 24% गिरा था। पर, तब निवेशकों को इतना नुकसान नहीं हुआ था। जाहिर है बाज़ार अब तेज़ी से मंदी के चक्र में गिर चुका है। खरीदने का शानदार मौका। मगर, आम निवेशकों के पास बाज़ार में लगाने को धन ही नहीं। फिर भी पेश है तथास्तु…औरऔर भी

वित्त वर्ष 2020-21 शुरू। कोरोना के चलते बीते वित्त वर्ष 2019-20 में अंत तक सेंसेक्स 24% और निफ्टी 26% से ज्यादा टूट गया। जल्दी ही मौसम विभाग मानसून का अनुमान पेश करेगा। लॉक-डाउन उठने में अभी 13 दिन बाकी हैं। इसमें से मात्र 5 दिन ट्रेडिंग होगी। रामनवमी, महावीर जयंती, गुड फ्राइडे व अम्बेडकर जयंती पर 4 दिन बाज़ार बंद है। ऊपर से 4 दिन शनि-रवि। सो, अगला कॉलम अब 15 अप्रैल को। फिलहाल बुध की बुद्धि…औरऔर भी

ब्रोकर संगठन बराबर मांग करते रहे कि शेयर बाज़ार में जिस तरह अफरातफरी मची है, निफ्टी हर दिन 400-500 अंक उठता-गिरता है, उसमें उसे कम से कम लॉक-डाउन की अवधि तक बंद कर देना चाहिए क्योंकि मौजूदा स्थिति न ट्रेडरों के लिए अच्छी है, न निवेशकों के लिए। लेकिन पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी इसके लिए तैयार नहीं हुई। कमाल है कि शेयर बाज़ार को आवश्यक सेवाओं का हिस्सा माना जा रहा है। अब मंगलवार का दृष्टि…औरऔर भी

मार्च का महीना शेयर बाज़ार में शॉर्ट-सेलिंग करनेवाले ट्रेडरों के लिए वैसे भी खतरनाक होता है। फिर इस बार तो कोरोना के कहर ने हालात को ज्यादा ही संगीन बना दिया है। ऊपर से दुनिया की शीर्ष रेटिंग एजेंसियों में से स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर का अनुमान घटाकर 3.5% और मूडीज़ ने मात्र 2.5% कर दिया है। ऐसी भयंकर निराशा में धन का प्रवाह सूखता जा रहा है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

पिछले 30 दिनों में निफ्टी 26.59% गिरा है, जबकि रिलायंस 24.60%, इनफोसिस 17.96%, एचडीएफसी 23.76%, लार्सन एंड टुब्रो 32.29% और एचडीएफसी बैंक 25.02% गिर चुका है। जाहिर है, ऐसी मजबूत कंपनियों के शेयर आंधी में ज़मीन पर टपके पक्के आम की तरह हैं जिन्हें उठा लेना एक-दो साल में फायदे का सौदा साबित हो सकता है। इस वक्त बाज़ार में निवेश के अवसरों की कमी नहीं। ऐसे में आज तथास्तु में महज जानने के लिए एक कंपनी…औरऔर भी

बाज़ार गिर रहा हो तो शॉर्ट-सेलिंग उसे गिराती ही चली जाती है। गिरावट जब बहुत ज्यादा बढ़ जाती है तो मांग उठती है कि शॉर्ट-सेलिंग पर रोक लगा दी जाए। हफ्ते भर पहले सेबी ने कुछ स्टॉक फ्यूचर्स की पोजिशन लिमिट आधी कर दी, इंडेक्स डेरिवेटिव्स में शॉर्ट-सेलिंग की सीमा बांध दी और कुछ शेयरों पर मार्जिन दर बढ़ा दी। मकसद था बाज़ार की उथल-पुथल को रोकना। वैसे, इधर शॉर्ट-कवरिंग भी चली है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी