कहावत है कि खुद मरे बिना स्वर्ग नहीं मिलता। उसी तरह खुद बाज़ार की थाह लिए बगैर कोई इससे नोट नहीं बना सकता। तो! ट्रेडर को बाज़ार की थाह लेने पर कितना वक्त लगाना चाहिए? बात डे-ट्रेडिंग नहीं, बल्कि पोजिशन ट्रेड की। नया ट्रेडर तो बुनियादी बातें सीखने पर जितना वक्त लगाए, उतना कम। जो इतना सीख चुका है, उसे रोज़ाना कम-से-कम दो घंटे बाज़ार के विश्लेषण और होमवर्क पर लगाने चाहिए। अब देखें बाज़ार की दशा-दिशा…औरऔर भी

गलतियां मंजे हुए ट्रेडर भी करते हैं। इसके बावजूद मुनाफा कमाते हैं क्योंकि वे अपने घाटे की सीमा या स्टॉप-लॉस बांध कर चलते हैं। स्टॉप-लॉस के दो आधार हैं, धन गंवाने की आपकी क्षमता और टेक्निकल एनालिसिस। सबसे पहले यह देखें कि किसी सौदे में आप कितना गंवा सकते हैं। सौदे को लेकर आश्वस्त नहीं हैं तो न्यूनतम रिस्क लें। फिर टेक्निकल एनालिसिस से निकलने का सटीक भाव तय कर लें। अब करते हैं रुख बाज़ार का…औरऔर भी

सौ कमाया। सौ गंवाया। रकम बराबर तो कमाने की खुशी और गंवाने का दुख बराबर होना चाहिए। लेकिन हम-आप जानते हैं कि सौ रुपए गंवाने की तकलीफ सौ रुपए कमाने की खुशी पर भारी पड़ती है। इसे निवेश की दुनिया में घाटे से बचने की मानसिकता कहते है। 100 गंवाने का दुख 200 कमाने के सुख से बराबर होता है। इसलिए स्टॉप-लॉस और लक्षित फायदे की लाइन छोटी-बड़ी होती है। मनोविज्ञान का खेल है ट्रेडिंग। अब आगे…औरऔर भी

यूं तो हमारे शेयर बाजारों में जिन 2500 से ज्यादा कंपनियों में रोज ट्रेडिग होती है, उसमें से मुझे लगता है कि तीन चौथाई निवेश के काबिल हैं। अर्थव्यवस्था की हालत दुरुस्त रही तो लंबे समय में ये सभी अपने शेयरधारकों को फायदा देंगी। लेकिन कभी-कभी कुछ अच्छी खबरें शेयरों को हवा दे देती हैं। जैसे, हमने ठीक सात दिन पहले बर्जर पेंट्स को कुछ सकारात्मक खबरों के आधार पर खरीदने की सिफारिश की थी। तब इसकाऔरऔर भी

बर्जर पेंट्स के चौथी तिमाही के नतीजे 15 मई को आएंगे। लेकिन इससे पहले कंपनी के शेयरों में सुगबुगाहट शुरू हो गई है। कल बुधवार को इसका शेयर बीएसई में 4.82 फीसदी बढ़कर 60.85 रुपए पर बंद हुआ, जबकि एनएसई में 5.25 फीसदी की बढ़त के साथ इसका आखिरी भाव 61.20 रुपए रहा है। बाजार के जानकारों की मानें तो अभी यह 63-64 रुपए तक आसानी से जा सकता है यानी इसमें तत्काल इसमें 4 फीसदी बढ़तऔरऔर भी