जापान में भयंकर भूकंप और सुनामी से जानमाल का भारी नुकसान हुआ है और इसमें सारी दुनिया से जापान को सहयोग व मदद मिलनी चाहिए। हालांकि जापान सरकार ने जिस तरह राहत व बचाव के लिए खटाक से 18,600 करोड़ डॉलर निकाल लिए हैं, वो वाकई सराहनीय कदम है। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं कि जापान इस संकट से उबर जाएगा, भले ही इसमें थोड़ा वक्त लगे और उसे तकलीफ उठानी पड़े। असल में जापान में पुनर्निर्माणऔरऔर भी

मैंने कल लिखा था कि वे निफ्टी में 5500 का स्तर तोड़ने की कोशिश करेंगे और 5550 के ऊपर पहुंच जाने पर कवरिंग शुरू कर देंगे। सारा कुछ ऐसा ही हो रहा है। मैंने अब कई फंड मैनेजरों को कहते हुए सुना है कि भारत को अंडर-परफॉर्म नहीं करना चाहिए था। मैं अगर वित्त मंत्री होता तो उनको दिखा देता कि भारत कैसे अपने बाजार पर उनके दबदबे को ठुकरा सकता है। मेरे सूत्रों का कहना हैऔरऔर भी

मित्रों! मैं जीवन में जबरदस्त जोखिम उठाने का आदी हो चुका हूं। लेकिन शेयर बाजार में जोखिम उठाने से ज़रा घबराता हूं, वह भी तब दूसरों का पैसा दांव पर लगा हो। इसलिए शुक्रवार 28 जनवरी को जब मैंने देखा कि टीसीआई फाइनेंस सुबह 111.85 रुपए पर ऊपरी सर्किट छूने के बाद दोपहर बारह-एक बजे तक 101.25 रुपए के निचले सर्किट पर पहुंच गया तो मुझे डर लगा कि जिन लोगों ने टीसीआई फाइनेंस में निवेश कियाऔरऔर भी

मुद्रास्फीति क्यों बढ़ रही है? मुद्रा का प्रसार ज्यादा है, जबकि क्रय-शक्ति ठहरी हुई है। नतीजतन मुद्रास्फीति बढ़ती जा रही है। निश्चित रूप से अगर मौद्रिक नीति के जरिए मुद्रास्फीति से लड़ना है तो ब्याज दरें बढ़ाना ही इकलौता विकल्प है। हालांकि, मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए आपूर्ति बढ़ाने, आयात शुल्क घटाने और जमाखोरी पर अंकुश लगाने जैसे कई दूसरे उपाय भी किए जा सकते हैं। अगर कारगर उपाय किए जाएंऔरऔर भी

कंपनियों के तीसरी तिमाही के नतीजों के आने का सिलसिला बस शुरू ही होने को है। इसलिए शेयरों की नई खरीद-ब्रिकी का खेल अब ज्यादा दूर नहीं है। अग्रणी कंपनियों के अच्छे नतीजे और फिर उनके भावों का सही स्तर पर आना या करेक्शन होना हमारे पूंजी बाजार का नियमित पहलू है। कंपनियों की लाभप्रदता की कयासबाजी को लेकर सावधान रहिए। हम इसके बारे में आपको पहले से आगाह करना चाहते हैं। बाकी तो आप खुद हीऔरऔर भी

आयकर अपीली न्यायाधिकरण (आईटीएटी) ने नया आदेश जारी कर बोफोर्स के भूत को फिर से जिंदा कर दिया है। लेकिन समझ में नहीं आता कि 24 साल पुराना यह मामला जा कहां रहा है। आईटीएटी के बाद अब यह मसला बॉम्बे हाईकोर्ट में जाएगा और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में। तब तक रिश्वतखोरी के इस कांड से जुड़े सभी लोग स्वर्ग सिधार चुके होंगे। विन चड्ढा तो पहले ही दिवंगत हो चुके हैं। फिलहाल अहम सवाल यहऔरऔर भी

बॉम्बे डाईंग के साथ ऐसा क्या बुरा हो गया जो उसे इस सेटलमेंट में ठोंककर 575 रुपए से 458.75 रुपए तक पहुंचा दिया गया? आज भी यह 525.90 और 510.10 रुपए के बीच झूला  है। 2 दिसंबर से 10 दिसंबर के बीच तो इसे  575 रुपए से गिराकर 458.75 रुपए पर पटक दिया गया। इसके डेरिवेटिव के साथ भी यही हरकत हुई है। इस दरम्यान कंपनी के साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जो उसके स्टॉक कोऔरऔर भी

हालांकि बाजार का सबसे बुरा वक्त या कहिए कि राहुकाल बीत चुका है, लेकिन अब भी दो और आसान मोहरे हैं जिनके दम पर चालबाज बाजार में उठापटक पैदा कर सकते हैं। फिलहाल बाजार से ऑपरेटर की अवधारणा ही खत्म होने जा रही है। इसलिए आगे से हमें दो नई अवधारओं पर केंद्रित करने की जरूरत है – एक, मार्केट मेकर (सेबी की इजाजत मिल चुकी है, लेकिन अमल में नहीं) और दो, बाजार के चालबाज याऔरऔर भी

बाजार (सेंसेक्स) खुला मुहूर्त से करीब 37 अंक बढ़कर, मगर बंद हुआ 152.58 अंक की गिरावट के साथ 20,852.38 पर जाकर। लेकिन घबराने की कोई बात नहीं। यह सब कुछ नहीं, बस मछली पकड़ने के जाल जैसा काम है। जाल को नीचे तक ले जाओ ताकि और मछलियां पकड़ में आ जाएं। बाजार अब पूरी तरह नियंत्रण में है और उतार-चढ़ाव इसलिए लाए जा रहे हैं ताकि आप यहां से वहां तक झूल, या कहें तो झूमऔरऔर भी

तिमाही नतीजों का यह मौसम तो मानसून की तरह बीत जाएगा। किसी खास कंपनी से बाजार को किन नतीजों की अपेक्षा है, इसके पूरा होने या टूटने के हिसाब से वो प्रतिक्रिया दिखाएगा। इससे उस शेयर की सांस तेजी से ऊपर-नीचे हो सकती है और निवेशकों को उसे पाने का अच्छा मौका भी मिल सकता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है यह जानना कि शेयरों की दिशा क्या है, लक्ष्य क्या है? नए नतीजों के साथ नए ईपीएसऔरऔर भी