चोर और सेंधमार डरते हैं इस बात से कि घरवाले जाग न जाए। इसी तरह सरकार व सत्ताधारी दल इस बात से डरते हैं कि जनता जाग न जाए, उसे सच्ची बात पता न चल जाए। इसलिए उनका तंत्र हमेशा असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की जुगत में लगा रहता है।और भीऔर भी

हम किस आशय/भाव से कोई बात कहते हैं, इसका कोई महत्व नहीं। महत्व इसका है कि उससे संदेश क्या गया, संप्रेषित क्या हुआ। सो, बोलने से पहले सामनेवाले की स्थिति पर गौर कर लेना चाहिए।और भीऔर भी

हर कोई सिर नीचे गाढ़कर चरे जा रहा है। जाल-जंजाल इतने कि जानी-पहचानी चीजों के अलावा और कुछ जानने की फुरसत नहीं। ऐसे में काम की चीज भी लोगों को भोंपू बजाकर सुनानी पड़ती है।और भीऔर भी