हर पांच दिन पर हमारा पेट अंदर से एकदम नया हो जाता है। हर छह हफ्ते बाद हमारे पास एकदम नया लीवर होता है। हर तीस दिन पर हमारी त्वचा एकदम नई हो जाती है। हर साल हमारा दिमाग अपनी कोशिकाओं को रिसाइकल कर नया हो जाता है। चार साल से भी कम वक्त में हमारा शरीर आखिरी अणु तक एकदम नया हो जाता है। इसलिए नए को सही खुराक और सांस मिले तो पुराने रोग अपने-आपऔरऔर भी

खून की एक बूंद सारा भेद खोल देती है कि शरीर का कौन-सा अंग कैसा काम कर रहा है? लीवर में क्या समस्या है और किडनी का हाल क्या है? लेकिन व्यक्तियों से बने समाज में क्या व्यक्ति वो इकाई है जो समाज के बीमार अंगों का भेद खोल सके?और भीऔर भी

सिर्फ भावनाओं से कुछ नहीं हो सकता। लेकिन भावनाओं के बिना भी कुछ नहीं हो सकता। भावनाएं उस लीवर का काम करती हैं जो कम बल से ज्यादा वजन उठाने की क्षमता देता है। भावनाएं ही हमें सक्रिय बनाती हैं। अन्यथा हम यूं ही पड़े रहें।और भीऔर भी