जैसी कि उम्मीद थी, जोश से भरे स्टॉक अब थकते नजर आ रहे हैं। ट्रेडरों और निवेशकों की दिलचस्पी भी इनमें घट गई है। दूसरी तरफ अभी तक किनारे पड़े शेयरों, खासकर मिड कैप व स्मॉल कैप स्टॉक्स में अच्छी-खासी दिलचस्पी दिखने लगी है। यह दिलचस्पी भी सच्चे दीर्घकालिक निवेशकों की तरफ से आ रही है, न कि रिटेल निवेशकों की तरफ से। रिटेल निवेशक तो आखिरकार रिटेल ही हैं। वे तो बस रोना-धोना ही जानते हैं।औरऔर भी

रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति से ज्यादा उम्मीद करने जैसा कुछ था ही नहीं। रेपो दर में चौथाई फीसदी की वृद्धि बाजार की लय को नहीं तोड़ सकती थी। बाजार अब तेजी के दौर में जा पहुंचा है। मजाक बहुत हो चुका है। अभी तक ऑपरेटरों ने रिटेल निवेशकों पर सवारी गांठी है और शेयर भावों को अपने हिसाब से तोड़ा-मरोड़ा है। पहले भारती एयरटेल को डाउनग्रेड किया गया और फिर अपग्रेड। अब मारुति को डाउनग्रेड कियाऔरऔर भी

सरकार की कथनी, करनी और सोच में भारी अंतर है। एक तरफ वह पूंजी बाजार को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना चाहती है, दूसरी तरफ पब्लिक इश्यू में उसने रिटेल (एक लाख रुपए से कम निवेश करनेवाले) निवेशकों की संख्या महज 35 फीसदी तक सीमित कर दी है, जबकि पहले क्यूआईबी (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल खरीदार) जैसे बड़े निवेशक नहीं थे और पूरे के पूरे इश्यू पब्लिक के लिए ही थे। यह कहना है पूंजी बाजार से जुड़ीऔरऔर भी

देश में शेयर ट्रेडिंग के लिए जरूरी डीमैट खातों की संख्या अभी भले ही 1.69 करोड़ तक सीमित हो, लेकिन इनका दायरा देश के 80 फीसदी पिनकोड पतों तक फैल चुका है। यह दावा है देश की प्रमुख डिपॉजिटरी संस्था एनएसडीएल (नेशनल सिक्यूरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड) का। एनएसडीएल में डीमैट खातों की संख्या अभी 1.02 करोड़ है, जबकि दूसरी डिपॉजिटरी संस्था सीडीएसएल (सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज इंडिया लिमिटेड) में इस समय कुल 67.06 लाख डीमैट खाते हैं। इनमें बंदऔरऔर भी

भारतीय नौवहन निगम लिमिटेड, हिंदी में यही नाम है शिंपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड या एससीआई का। बुधवार को करीब 11.30 बजे कंपनी ने एक छोटी सी घोषणा की कि वह 29 मई को होनेवाली निदेशक बोर्ड की बैठक में अपनी अधिकृत शेयर पूंजी बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी विचार कर सकती है। इससे पहले 26 अप्रैल को उसने स्टॉक एक्सचेंजो को सूचित किया था कि वह 29 मई को निदेशक बोर्ड की बैठक में 31 मार्चऔरऔर भी

सरकार लिस्टेड कंपनियों में आम निवेशकों की शिरकत व हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए बेचैन है। इस सिलसिले में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने पिछले साल जुलाई में ही बजट पेश करते वक्त ऐसी कंपनियों में आम निवेशकों या पब्लिक की शेयरधारिता कम से कम 25 फीसदी रखने का प्रस्ताव रखा था। इस पर अमल की तैयारियां तेज हो गई हैं। वित्त मंत्रालय और कॉरपोरेट मामलात मंत्रालय के साथ के कानून मंत्रालय को भी हरकत में आना पड़ाऔरऔर भी

इस समय रीयल्टी क्षेत्र के शेयरों में काफी शॉर्ट सेलिंग ब्याज दरें बढ़ने के अंदेशे में हो रही है। लेकिन मैं तो हमेशा की तरह जब हर कोई बेच रहा होता है, तब खरीदने के पक्ष में रहता हूं। वैसे भी रीयल्टी सेक्टर मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं मानता हूं कि रीयल्टी कंपनियों के लिए लागत में जितना पलीता लगता है, उतना ही वे अपनी प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ाते हैं और उनका परिचालन लाभ मार्जिन (ओपीएम) घटनेऔरऔर भी

कल हमने सीएनआई पर आपको दिखाया कि कैसे निफ्टी 5250 से लुढ़क कर 4650 तक आया और फिर हर तरफ यही दहशत फैलाई जाने लगी कि अब यह गिरकर 3800 तक पहुंच जाएगा। इसके बावजूद हम यही कहते रहे कि बाजार ऊपर उठेगा। इस दरमियान हमने पांच-सात बार निफ्टी में ट्रेडिंग के जरिए आपको मुनाफा कमाने का मौका दिया। आज भी हमने साबित कर दिया कि चंद ब्रोकर कैसे आपको उल्लू बनाते हैं। उन्होंने आइडिया और भारतीऔरऔर भी

एक चैनल पर मैं उसी शख्स को देख रहा था जिसने दावा किया था कि निफ्टी 3800 तक गिर जाएगा। मैं उसका चेहरा देखता रह गया क्योंकि वो अब भी कह रहा था कि बाजार में कोई दम नहीं है, तेजी जल्दी ही पिघल जाएगी और अभी कुछ नहीं, बस शॉर्ट कवरिंग चल रही है और बाजार गिरावट के मुहाने पर खड़ा है। अब भी वह शख्स दावे के साथ कह रहा था कि 3800 नहीं तोऔरऔर भी

हफ्ते का पहला दिन कारोबारियों के लिए बेहद बोरिंग रहा। निफ्टी में किसी तरह का कोई उत्साह नहीं नजर आया, जबकि मुद्रास्फीति का मसला ऐसे मोड़ पर है जहां उसे प्रतिक्रिया करनी चाहिए। हमारा मानना था कि निफ्टी 5136 का स्तर पार करने के बाद अच्छी-खासी चमक दिखाएगा क्योंकि ज्यादातर कारोबारी मुद्रास्फीति के बढ़ने के बाद शॉर्ट सेलिंग कर चुके हैं। यहां तक कि वे रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) में शॉर्ट हैं क्योंकि इस सेटलमेंट में इसका चार्टऔरऔर भी