डेरिवेटिव सौदों में पिछले तीन दिनों से लांग पोजिशन को समेटा जा रहा है और नए शॉर्ट सौदे किए जा रहे हैं। मंदड़ियों को यकीन हो चला है कि सितंबर में हिन्डेनबर्ग अपशगुन घटेगा और उन्होंने बिना किसी भय के सारी शॉर्ट पोजिशन सितंबर तक बढ़ा दी है। अब वे दुनिया के बाजारों पर अपशगुन का कहर गिरने का इंतजार करेंगे ताकि भारतीय बाजार को गिराया जा सके। ज्यादातर फंड बराबर यही कहे जा रहे हैं किऔरऔर भी

भले ही देश के सबसे पुराने उद्योग समूह टाटा में रतन टाटा के उत्तराधिकारी की तलाश जोरशोर से शुरू हो चुकी हो और देश की प्रमुख आईटी कंपनी इनफोसिस तक में नारायण मूर्ति की जगह भरने की कोशिशें तेज हो गई हों, लेकिन तीन चौथाई से ज्यादा भारतीय कंपनियों में अगला सीईओ कौन होगा, इस पर चर्चा तक नहीं होती। यह निष्कर्ष है अमेरिकी सलाहकार फर्म बेन एंड कंपनी के एक ताजा सर्वेक्षण का। लंदन से प्रकाशितऔरऔर भी

इनफोसिस टेक्नोलॉजीज जैसी नामी कंपनी को भी छोड़कर जानेवालों की कमी नहीं है। इनफोसिस देश में टीसीएस के बाद दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी है। वहां काम का माहौल जबरदस्त माना जाता है। कंपनी ने इसी 2 जुलाई को अपनी तीसवीं सालगिरह पर सभी कर्मचारियों को 5.69 लाख शेयर मुफ्त में बांटे हैं। लेकिन इसके बावजूद चालू वित्त वर्ष 2010-11 में अप्रैल-जून की पहली तिमाही में उसे छोड़कर जानेवाले कर्मचारियों की संख्या 15.8 फीसदी बढ़ गई है।औरऔर भी

इनफोसिस के पहली तिमाही के नतीजे उत्साह बढ़ानेवाले नहीं थे। लेकिन इसने बाजार का मूड नहीं बिगाड़ा। वैश्विक फंड भारत के बारे में ज्यादा से ज्यादा तेजी की धारणा अपनाते जा रहे हैं। आज ही इनमें से कुछ ने समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग को दिए गए इंटरव्यू में अपनी यह सोच जाहिर की है। हम भी बराबर इसी सोच पर कायम है। कितने अफसोस की बात है कि निफ्टी जब 4800 पर था तब आप मंदड़ियों की सुनऔरऔर भी