इतने कम में काम कैसे चला लेते हो भाई! जरूरतें बढ़ाओ और उनको पूरा करने का पुरुषार्थ करो। नहीं तो जिंदगी यूं ही अकारथ चली जाएगी और आप जहां से चले थे, वहीं तक सिकुड़े रह जाएंगे।और भीऔर भी

किसी भी चीज का ऊपर से नीचे गिरना नियति है। लेकिन गुरुत्वाकर्षण जैसे नियमों को समझ जहाज बनाकर नीचे से ऊपर उड़ा देना इंसान की स्वतंत्रता है। यही है नियति की अधीनता और कर्म की प्रधानता।और भीऔर भी