पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने 27 अगस्त 2007 से ही डीमैट खातों के लिए पैन (परमानेंट एकाउंट नंबर) को अनिवार्य कर दिया था। लेकिन अब भी बहुत सारे निवेशक हैं जिन्होंने अपने डीमैट खातों के डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (डीपी) के पास पैन नंबर की पुष्टि नहीं कराई है। इसके लिए उन्हें पैन कार्ड की फोटोकॉपी वगैरह देनी थी। अभी तक पैन वेरिफिकेशन न करानेवाले निवेशक अपने खाते से कुछ डेबिट नहीं सकते थे। लेकिन सेबी ने अबऔरऔर भी

आज के स्टार परफॉर्मर रहे आईएफसीआई व टीटीएमएल (टाटा टेली महाराष्ट्र लिमिटेड) और इन दोनों के बारे में हम काफी समय से लिख रहे हैं। बैंकिंग शेयरों ने भी अच्छी गति पकड़ी। फ्यूचर सौदों में फिजिकल सेटलमेंट न होने के कुछ शिकार नजर आ रहे हैं। जेएसडब्ल्यू होल्डिंग्स 1750 रुपए तक हिट रहा, हालांकि इसकी कोई जरूरत नहीं थी। इसी तरह एचसीसी 128 रुपए तक मार करता रहा और उसने तमाम स्टॉप लॉस और मार्क टू मार्केटऔरऔर भी

नैवेली लिग्नाइट कॉरपोरेशन (एनएलसी) बढ़ रही है, लेकिन उसका शेयर ठहरा हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी ने इस साल जून की पहली तिमाही में 342.10 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हासिल किया है जो साल भर पहले की इसी अवधि के शुद्ध लाभ 287.64 करोड़ रुपए से 18.93 फीसदी ज्यादा है। इससे पहले पूरे वित्त वर्ष 2009-10 में उसका शुद्ध लाभ 52 फीसदी बढ़ा था। उसका परिचालन लाभ मार्जिन (ओपीएम) अब 51.49 फीसदी हो गयाऔरऔर भी

बाजार में गिरावट आई तो इसकी मुख्य वजह यह है कि डेरिवेटिव सौदों के रोलओवर ज्यादा नहीं हो रहे हैं। कारोबारियों को चिंता है कि निफ्टी 5450 के स्तर को कायम नहीं रख पा रहा है। लेकिन यह तात्कालिक असर है। हम बाजार में इस तरह की पस्ती व घबराहट एक दिन और देख सकते हैं। गिरावट से ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर आप और ज्यादा करेक्शन/गिरावट के अंदेशे में शॉर्ट सौदे करऔरऔर भी

किसी शेयर की बुक वैल्यू 17.97 रुपए हो और बाजार में उसका भाव पिछले कई महीनों से 12-14 रुपए चल रहा हो तो समझ में नहीं आता। लेकिन नाकोडा लिमिटेड का हाल ऐसा ही है। ऐसा नहीं कि इसके बारे में किसी को जानकारी न हो और यह कोई गुमनाम कंपनी हो। मीडिया से लेकर इंटरनेट के अलग-अलग फोरम पर इसके बारे में बराबर लिखा जा रहा है। कइयों ने इसे मल्टी बैगर (कई गुना रिटर्न देनेवाला)औरऔर भी

बाजार खुला तो बढ़कर, लेकिन कल आनेवाली क्रेडिट पॉलिसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज के नतीजों और डेरिवेटिव (फ्यूचर्स व ऑप्शंस) की एक्सपायरी से जुड़ी चिंताओं ने उसे बांध रखा है। ट्रेडरों ने काफी शॉर्ट सौदे कर रखे हैं। बाजार को कल रिजर्व बैंक की तरफ से ब्याज दरों में वृद्धि और रिलायंस के उतने अच्छे नहीं आने की उम्मीद है। शॉर्ट सौदों की खास वजह यही है। मेरा अपना मानना है कि बाजार तेजी के एक नए चक्र मेंऔरऔर भी

ऋद्धि सिद्धि ग्लूको बिऑल्स देश में स्टार्च और उस पर आधारित उत्पाद बनानेवाली सबसे बड़ी कंपनी है। वह लगभग 35 उत्पाद बनाती है जिसमें तरल ग्लूकोज, डेक्सट्रोज, मोनोहाइड्रेट और मक्के का स्टार्च पाउडर शामिल हैं। उसने हिंदुस्तान लीवर और ग्लैक्सो तक की कॉर्न प्रोसेसिंग इकाइयां अतीत में खरीदी हैं। अहमदाबाद में इसका मुख्यालय है और इसकी उत्पादन इकाइयां गोकाक (कर्नाटक), पंतनगर (उत्तराखंड) और वीरमगाम (गुजरात) में हैं। इसमें फ्रांस की बहुराष्ट्रीय कंपनी रोके फ्रेरे (Roquette Freres)  नेऔरऔर भी

फिनोलेक्स इंडस्ट्रीज (एफआईएल) का शेयर हफ्ते भर पहले ही 14 जुलाई को 95.90 रुपए पर 52 हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंचा है। अभी यह 89.65 रुपए पर चल रहा है जो 2009-10 के ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 10.67 रुपए से 8.41 गुना है। इसी की जैसी अन्य कंपनियों में जैन इरिगेशन का पी/ई अनुपात 33.31 और सिंटेक्स इंडस्ट्रीज का पी/ई अनुपात 16.84 है। फिनोलेक्स इंडस्ट्रीज के शेयर की बुक वैल्यू 47.23 रुपए है। इस तरह उसकेऔरऔर भी

रोलओवर शुरू हो चुका है और उम्मीद के अनुरूप बाजार बढ़त पर है। फिलहाल किसी खास गिरावट के आसार नहीं हैं। लेकिन हमें यह बात दिमाग के किसी कोने में बैठाकर रखनी पड़ेगी कि निफ्टी के 5300 अंक तक करेक्शन आ सकता है। ऊपर की दिशा में 5440 का स्तर नजर आ रहा है। भले ही खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति थोड़ी घट रही हो, लेकिन रिजर्व बैंक ब्याज दरें बढ़ा सकता है। वैसे, रिजर्व बैंक इधर चौंकानेऔरऔर भी

मारुति सुजुकी का नाम ही काफी है। कंपनी पहली तिमाही के नतीजे इसी हफ्ते शनिवार 24 जुलाई को घोषित करने जा रही है। वित्त वर्ष 2009-10 में उसने 29,629 करोड़ रुपए की आय पर 2497.62 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। उसके पास 31 मार्च 2010 तक 11,690.6 करोड़ रुपए के रिजर्व थे। कंपनी की इक्विटी 144.46 करोड़ रुपए है। इसका 54.21 फीसदी हिस्सा जापानी कंपनी सुजुकी के पास और बाकी 45.79 फीसदी हिस्सा पब्लिक केऔरऔर भी