ऑलकार्गो ग्लोबल लॉजिस्टिक्स (बीएसई कोड-532749) का शेयर बहुत सस्ता तो नहीं कहा जा सकता क्योंकि इसकी बुक वैल्यू 70.74 रुपए है जबकि शेयर का भाव इस समय बीएसई में 170 रुपए तो एनएसई में 170.45 रुपए चल रहा है। यानी बुक वैल्यू से करीब 2.40 गुना। लेकिन पी/ई अनुपात के लिहाज से देखें तो यह अपनी समकक्ष कंपनियों – ब्लू डार्ट और गति से अपेक्षाकृत सस्ता है। इसका पी/ई अनुपात 21.23 है तो ब्लू डार्ट का 30.41औरऔर भी

निवेश की दुनिया की जानीमानी फर्म नोमुरा सिक्यूरिटीज के प्रतिनिधि ने आज ब्लूमबर्ग को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा कि वे भारतीय बाजार के प्रति अब न इधर की, न उधर की, बस बीच की राय रखते हैं। सही बात है कि सेंसेक्स का 18,000 पर पहुंचना एफआईआई तक के बीच बाजार के महंगा होने की थोड़ी झुरझुरी पैदा कर सकता है। लेकिन मेरा यकीन मानिए। एफआईआई ने केवल जुलाई महीने में बाजार में 16,000 करोड़औरऔर भी

क्या आप हर दिन पौधे को उखाड़कर देखते हैं कि उसकी जड़ें कहां तक पहुंचीं? फिर आप हर दिन निवेश को इतना उलट-पुलट कर क्यों देखते हैं! इससे आपकी नींद हराम होने के अलावा कुछ नहीं मिलता।और भीऔर भी

बड़ी आम-सी बात हो गई है कि जब दुनिया के बाजार बढ़ते हैं तो हमारे बाजार में करेक्शन आ जाता है। भारतीय शेयर बाजार कल काफी बढ़े। लेकिन आज जब दुनिया के बाजार बढ़त पर थे तब हम कमोबेश ठंडे पड़े रहे। यह काफी समय से हो रहा है। हो सकता है कि यह इंट्रा-डे ट्रेडरों को छकाने की चाल हो। व्यापक तौर पर माना जा रहा है कि निफ्टी का 5500 के ऊपर जाना बेहद मुश्किलऔरऔर भी

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स जून 1990 में 850 अंक पर था। जून 2000 में यह 4850 अंक पर पहुंचा और अब जून 2010 में 17,700 अंक पर। इस तरह 20 साल में इसने मूलधन को 20 गुना बढ़ा दिया है। सालाना चक्रवृद्धि दर से देखें तो इसने 1990-2000 के दौरान 18.8 फीसदी और 2000-2010 के बीच 14.1 फीसदी सालाना रिटर्न दिया है। पूरे दो दशकों का औसत सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न 16.4 फीसदी का है।औरऔर भी

निटको कंपनी या ब्रांड के नाम से शायद आप परिचित होंगे। 1953 में बनी कंपनी है और टाइल्स व मार्बल का धंधा करती है। टाइल्स वह मुंबई के बाहर अलीबाग में बनाती है और इटली, स्पेन, चेकोस्लवाकिया व चीन जैसे देशों से आयातित मार्बल की प्रोसेंगिग मुंबई के भीतर कांजुर मार्ग में करती है। कंपनी ने 2009-10 में कुल मिलाकर 8.71 करोड़ रुपए का घाटा उठाया था। लेकिन मार्च 2010 की तिमाही में वह 2.50 करोड़ रुपएऔरऔर भी

मुझे पहले से आभास था और अब मैं सुन भी रहा हूं कि रिलांयस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) अपने 4 करोड़ ट्रेजरी शेयर (बगैर वोटिंग अधिकार वाले शेयर) 1098 रुपए के भाव से बेचेगी और हो सकता है कि ऐसा कल सुबह ही हो जाए। इससे बाजार में चहक बनी रह सकती है। बाजार अब गति पकड़ रहा है क्योंकि पहली तिमाही के लगभग सारे नतीजे जा चुके हैं और बस पूंछ बाकी रह गई है। अगला आवेग यहऔरऔर भी

मर्क लिमिटेड (बीएसई कोड-500126) का नाम पहले ई. मर्क हुआ करता था। यह बीएसई के साथ-साथ एनएसई में भी लिस्टेड है। फार्मा और केमिकल उद्योग की बहुराष्ट्रीय कंपनी है। इस समूह की मौजूदगी दुनिया के 64 देशों में है। मूल कंपनी जर्मनी की है जिसने सारे यूरोपीय संकट के बीच भी जून 2010 की तिमाही में 18.34 करोड़ यूरो का शुद्ध लाभ कमाया है जो पिछले साल की समान अवधि के शुद्ध लाभ 10.85 करोड़ यूरो सेऔरऔर भी

नए सेटलमेंट का पहला ही दिन। और, एचसीसी ने सबको चौंका कर रख दिया। अभी एचसीसी में और भी चौंकानेवाली खबरें आनेवाली हैं। सोचिए इस स्टॉक को हमने तब उठाया, जब कहीं इसकी चर्चा ही नहीं थी। अब कंपनी ने अच्छे नतीजों के साथ-साथ एक पर एक बोनस शेयर देने की घोषणा भी कर दी है। वैसे, आपकी उम्मीद यही थम सकती है। लेकिन हमारे लिए यह अगले पांच महीनों तक आकर्षण का केंद्र बना रहेगा क्योंकिऔरऔर भी

अलेम्बिक (बीएसई कोड – 506235), इलेक्ट्रोस्टील कास्टिंग्स (बीएसई कोड – 500128) और विविमेड लैब्स (बीएसई कोड – 532660)। ये तीन कंपनियां बीएसई के बी ग्रुप में शामिल हैं और एनएसई में भी लिस्टेड हैं। एंजेल ब्रोकिंग के डायरेक्टर-रिसर्च ललित ठक्कर का मानना है कि ये तीनों स्टॉक काफी संभावना रखते हैं। इनमें कोई न कोई ट्रिगर है और साल भर में ये 40 से 50 फीसदी का रिटर्न दे सकते हैं। यानी, आज आपने इनमें 1000 रुपएऔरऔर भी