मर्क की मंजिल साल भर में दोगुनी

मर्क लिमिटेड (बीएसई कोड-500126) का नाम पहले ई. मर्क हुआ करता था। यह बीएसई के साथ-साथ एनएसई में भी लिस्टेड है। फार्मा और केमिकल उद्योग की बहुराष्ट्रीय कंपनी है। इस समूह की मौजूदगी दुनिया के 64 देशों में है। मूल कंपनी जर्मनी की है जिसने सारे यूरोपीय संकट के बीच भी जून 2010 की तिमाही में 18.34 करोड़ यूरो का शुद्ध लाभ कमाया है जो पिछले साल की समान अवधि के शुद्ध लाभ 10.85 करोड़ यूरो से 69 फीसदी ज्यादा है। भारतीय कंपनी मर्क ने पिछले हफ्ते घोषित नतीजों के मुताबिक जून 2010 की तिमाही में 18.46 करोड़ रुपए का शुद्ध हासिल किया है, जो साल पहले की इसी अवघि के शुद्ध लाभ 11.89 करोड़ रुपए से 55.25 फीसदी अधिक है।

कंपनी का दस रुपए अंकित मूल्य का शेयर अभी 724 रुपए चल रहा है। जानकारों का कहना है कि कंपनी अपने बहुत सारे अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय अब भारत ला रही है। इससे भारतीय कंपनी का कारोबार अच्छा-खासा बढ़ेगा और यह शेयर साल भर में 1200-1500 रुपए तक जा सकता है। बता दें कि 19 अगस्त 2009 को इस शेयर का भाव बीएसई में 385.50 रुपए था, जबकि इस साल 12 जुलाई को 830.15 रुपए के शिखर पर पहुंच चुका है। कंपनी की 16.60 करोड़ रुपए की इक्विटी में 51.80 फीसदी शेयर विदेशी प्रवर्तक समूह के पास हैं, जबकि 5.58 फीसदी शेयर एफआईआई और 14.17 फीसदी शेयर घरेलू संस्थाओं के पास हैं।

कंपनी का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 47.47 रुपए है और उसका शेयर 15.25 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। उसकी बुक वैल्यू 301.88 रुपए है। इसका ट्रेडिग लॉट एक शेयर का है। मर्क लिमिटेड भारत में 1967 से मौजूद है। उसका पब्लिक इश्यू 1981 में आया था। कंपनी ने 10 जून 2009 से लेकर 19 मई 2010 के बीच अपने 2.62 लाख शेयर बायबैक किए हैं और इसमें प्रति शेयर औसत मूल्य 396.16 रुपए रहा है। बायबैक से पहले कंपनी की इक्विटी 16.86 करोड़ रुपए थी, अब 16.60 करोड़ रुपए हो गई है।

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