सरहद और सरकारों के तंत्र से राष्ट्र नहीं बना करते। बहुमत का हुंकार भी राष्ट्र नहीं बनाता। इसे किसी पर थोपा नहीं जा सकता। राष्ट्र बनता है दिल से, भरोसे से और साझा समस्याओं की साझा समझ से।और भीऔर भी

आप कोई भगवान तो हो नहीं कि आपका दिया पाने के लिए पात्रता जरूरी है। आप दिल से देना चाहते हैं तो आप ही को सुनिश्चित करना पड़ेगा कि सामनेवाले को मिला कि नहीं। उस पर तोहमत मढ़ने का कोई तुक नहीं है।और भीऔर भी