अर्थ और वित्त की दुनिया बड़ी निर्मम है। यहां भावना और भावुकता से ऊपर उठकर सीधा-सीधा हिसाब चलता है। जापान में त्राहि-त्राहि मची है। लेकिन चूंकि जापान दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा ग्राहक है और वहां तमाम रिफानरियां आग की चपेट में आ गई हैं तो वे बंद रहेंगी जिससे तेल की मांग तात्कालिक रूप से घट जाएगी। सो, कच्चे तेल के दाम खटाक से 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गए। लेकिनऔरऔर भी

हर चीज की अति हमेशा बुरी ही होती है, प्रतिक्रिया की भी। खासकर अति-प्रतिक्रिया निवेशक पर ज्यादा ही चोट करती है। मुद्रास्फीति, ब्याज दरों में वृद्धि और यहां से निकलकर विदेशी पूंजी के विकसित देशों में जाने को लेकर निफ्टी जिस तरह 200 दिनों के मूविंग एवरेज (डीएमए) से नीचे चला गया, वह निश्चित रूप से बाजार की अति-प्रतिक्रिया को दर्शाता है। ऐसा ही 2008 में लेहमान संकट के बाद हुआ था, जब तमाम ब्रोकर ढोल पीटऔरऔर भी

हमारा मानना है कि बीएसई सेंसेक्स दीवाली पर ज्यादा नहीं तो 21,000 तक जरूर जा सकता है। देखते हैं कि ऐसा होता है या नहीं। कोल इंडिया के आईपीओ से मिले रिफंड और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की टीम में शामिल 200 सीईओ बाजार में नई पूंजी प्रवाह का जरिया बनेंगे। जब हमने शुक्रवार को निफ्टी में 5986 पर खरीद की कॉल पेश की तो सभी लोगों ने हमें फिर से पागल करार देने की कोशिश की।औरऔर भी

निफ्टी गुरुवार को इस सेटलमेंट की समाप्ति से पहले 6290 तक जा सकता है क्योंकि तमाम शॉर्ट सौदे अभी कटने बाकी हैं। जबरदस्त रिकवरी का सेटलमेंट रहा है यह। इसमें निफ्टी 5400 से उठकर 6100 तक पहुंचा है। इसलिए तेजड़िए अपना सारा दम निफ्टी को 6290 तक ले जाने में लगा देंगे। निफ्टी में इससे पहले का उच्चतम स्तर 6337 का रहा है। हालांकि करेक्शन का होना तय है, लेकिन अगले सेटलमेंट से पहले ऐसा नहीं होगा।औरऔर भी