दुनियादारी
जिंदगी में हमेशा बच्चे रहे। जुबान के हमेशा कच्चे रहे। सोच में हमेशा लुच्चे रहे। हर किसी को अपने आगे टुच्चा समझते रहे। ऐसे में दुनिया क्या खाक सधेगी? अपने में ही डूबे रहे और जमाने को देखा-भाला नहीं तो वह भाव दे भी तो भला कैसे!और भीऔर भी
जिंदगी में हमेशा बच्चे रहे। जुबान के हमेशा कच्चे रहे। सोच में हमेशा लुच्चे रहे। हर किसी को अपने आगे टुच्चा समझते रहे। ऐसे में दुनिया क्या खाक सधेगी? अपने में ही डूबे रहे और जमाने को देखा-भाला नहीं तो वह भाव दे भी तो भला कैसे!और भीऔर भी
बुद्ध अपने जमाने तक ज्ञात हालात में सधे हुए चिंतक थे, सुधारक थे, मसीहा थे। लेकिन तब के बुद्ध अब आम हो चुके हैं। आज किसी को खास बुद्ध बनना है तो उसे उसी तरह ज्ञात व उपलब्ध हालात को साधना पड़ेगा, जैसे तब के बुद्ध से साधा था।और भीऔर भी
आज के जमाने में सच्ची देशभक्ति का मतलब है उन लोगों को बेनकाब करना जो राष्ट्र की संपदा की निजी लूट में शामिल हैं। वे राष्ट्रद्रोही हैं जो जनता से मिले टैक्स या राष्ट्र के नाम पर लिए गए कर्ज का अपव्यय कर दलालों की तिजोरी भर रहे हैं।और भीऔर भी
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