सेंचुरी टेक्सटाइल्स के 400 से बढ़कर 455 रुपए और एचडीआईएल के 164 से बढ़कर 200 रुपए तक पहुंचने ने साफ-साफ रीयल्टी सेक्टर में छिपी संभावनाओं की झलक दिखा दी है। यह बात आप खुली आंखों से देख सकते हैं। लेकिन भविष्य के गर्भ में छिपी लंबी कहानी आपको दिमाग लगाकर पढ़नी होगी। निफ्टी 5750 से पलटकर 5960 तक आ चुका है। बहुत से लोग अब भी कह रहे हैं कि यह तात्कालिक राहत की रैली है। लेकिनऔरऔर भी

कभी-कभी कुछ चीजों का साक्ष्य नहीं होता, लेकिन इससे वो चीजें गलत नहीं हो जातीं। मैं यहां ईश्वर जैसी सत्ता की नहीं, बल्कि शेयर बाजार में अभी हाल में चले खेल की बात कर रहा हूं। साधारण-सी रिश्वतखोरी को बडे घोटाले की तरह पेश करना, लोड सिंडिकेशन के काम में लगी मनी मैटर्स फाइनेंशियल सर्विसेज को निपटाना, सेंसेक्स से ज्यादा मिड कैप और स्माल कैप शेयरों को पीट डालना, कुछ ऑपरेटरों को रत्ती भर भी आंच नऔरऔर भी

तमाम अखबार, पत्र-पत्रिकाएं और बिजनेस चैनल भारतीय शेयर बाजार को लगी 1200 अंकों से ज्यादा की चपत की वजह वैश्विक कारकों में तलाश रहे हैं। लेकिन हमारा मानना है कि असली बात यह नहीं है। लेहमान ब्रदर्स के डूबने का मसला हो या उसके बाद के तमाम वैश्विक कारक हों, उन्होंने यकीकन कमजोर बाजारों को चोट पहुंचाई, लेकिन इनके बीच भारतीय बाजार ने पुरानी ऊंचाई फिर से हासिल कर ली और यही नहीं, दूसरी अर्थव्यवस्थाओं ने हमाराऔरऔर भी

बीएसई सेंसेक्स इधर-उधर होता रहा, फिर भी उसमें ज्यादा गिरावट नहीं आई। एनएसई निफ्टी 5477 अंक को पार नही कर सका तो बाजार में करेक्शन आ गया और जो भी थोड़ी-बहुत बढ़त हुई थी, मिट गई। लेकिन इसके कोई खास फर्क नहीं पड़ता। हकीकत यह है कि एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) यानी अमीर निवेशक अब बाजार में लौट रहे हैं और कैश सेगमेंट का सतहीपन मिट रहा है, गहराई आ रही है। सभी छोटे-मोटे ऑपरेटर सक्रिय होऔरऔर भी

पिंक पैंथर हॉलीवुड की फिल्म भी है, कार्टून कैरेक्टर भी। पिंक पैंथर-2 में ऐश्वर्या राय भी काम कर चुकी हैं। लेकिन शेयर बाजार की महफिलों में पिंक पैंथर का एक ही नाम है – केतन पारेख। केतन पारेख पर भले ही सेबी ने बैन लगा हो, लेकिन माना यही जाता है कि यह शख्स बाजार में किसी न किसी रूप में बराबर सक्रिय रहता है। केतन ने जितनी भी फर्में बनाईं, ज्यादातर के नाम में पैंथर शब्दऔरऔर भी