हम सभी अपने वर्तमान से दुखी, अतीत पर मुग्ध और भविष्य को लेकर डरे हुए क्यों रहते हैं? क्या हम आज को लेकर मगन, बीत चुके पल के प्रति निर्मम और आनेवाले कल को लेकर बिंदास नहीं हो सकते?और भीऔर भी

आज के जरूरी खर्च हम कल पर नहीं टाल सकते और कल का निवेश आज रोक नहीं सकते क्योंकि उपभोग तो आज की जरूरत पूरा करने के लिए ही है जबकि निवेश आज की नहीं, कल की सोचकर आज किया जाना है।और भीऔर भी

काम पर किसी का नाम नहीं लिखा रहता। आप चूके तो कोई और कर लेगा। यह नियम साहित्य सृजन जैसे विशिष्ट काम पर भी लागू होता है। इसलिए नाम पाना है कि काम को कल पर नहीं टालना चाहिए।और भीऔर भी