खुद को जीतना सबसे बड़ी जीत है। यहीं से हर विजय-पथ की चाभी मिलती है। अगर अपने को नहीं जीत सके, संयम नहीं रख सके तो कुछ भी हासिल करना असंभव है क्योंकि बिखरी-बिखरी शक्तियां आपकी मारक क्षमता को ही मार देती हैं।और भीऔर भी

हो सकता है कि कोई रेत को मसल कर तेल निकाल ले, मरीचिका से भी अपनी प्यास बुझा ले, गधे तक के सिर पर सींग देख ले, लेकिन एक दम्भी मूर्ख को प्रसन्न कर पाना किसी के लिए भी असंभव है।और भीऔर भी

धन चला जाए तो पाया जा सकता है। स्वास्थ्य चला जाए तो दोबारा हासिल किया जा सकता है। यहां तक कि चरित्र भी चला जाए तो उसे सुधारा जा सकता है। लेकिन समय चला जाए तो उसे फिर से पाना असंभव है।और भीऔर भी